गोपेश्वर। अमृत गंगा पेयजल योजना के क्षतिग्रस्त होने से गोपेश्वर नगर में पांच दिनों से पानी का संकट बना हुआ है। लोग प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। यहां करीब 40 हजार की आबादी को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
17 अगस्त को मंडल घाटी में हुई भारी बारिश के कारण देवलधार गांव के समीप अमृत गंगा पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से यहां पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। जल संस्थान के कर्मचारी पेयजल योजना सुचारु करने में जुटे हैं, लेकिन पाइप लाइनों पर कचरा फंस जाने से पानी की सुचारु सप्लाई नहीं हो पा रही है। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से पंवलधार गांव को जाने वाला पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष अंकोला पुरोहित, पूर्व सांसद प्रतिनिधि विकास जुगरान, विक्रम सिंह और महेंद्र सिंह रावत का कहना है कि वर्ष 2015 में अमृत गंगा पेयजल योजना का निर्माण हुआ, लेकिन योजना के मुख्य स्रोत पर फिल्टर की व्यवस्था न होने से बारिश के दौरान पानी के साथ कचरा भी पाइप लाइन में आ रहा है जिससे बार-बार पेयजल सप्लाई ठप हो रही है। अब पांच दिनों से एक बूंद पानी नहीं टपका है। प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढो रहे हैं। जल संस्थान के सहायक अभियंता अरुण गुप्ता का कहना है कि विभागीय कर्मचारी प्रतिदिन लाइन को ठीक करने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन बारिश होने से योजना को सुचारु नहीं किया जा सका है। बुधवार तक पेयजल सप्लाई सुचारु कर दी जाएगी।
पेयजल आपूर्ति सुचारु करने की मांग
गोपेश्वर। दशोली ब्लाक के ग्राम पंचायत डुंग्री के स्वींग-बिजराकोट गांव में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने डीएम से भेंटकर शीघ्र पेयजल आपूर्ति सुचारु करवाने की मांग उठाई। सतेंद्र सिंह, जसपाल सिंह, ललित, संजय सिंह, बचन सिंह, मीना, राजेंद्र, गंगा सिंह, त्रिलोक सिंह और रघुवीर ने बताया कि चालू वर्ष के मार्च माह में जल संस्थान ने पेयजल कनेक्शन देने के नाम पर गांव के 22 परिवारों से प्रति परिवार 25-25 सौ रुपये लिए लेकिन सुचारु पेयजल आपूर्ति कभी नहीं हुई। डीएम स्वाती एस भदौरिया ने मामले में जल संस्थान के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगकर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।