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स्थायी ठौर के इंतजार में झलिया के प्रभावित

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देवाल। आपदा प्रभावित गांव झलिया का स्थायी विस्थापन का मामला सुलझ नहीं रहा है। हालांकि प्रशासन ने आपदा प्रभावित 12 परिवारों के नंदकेशरी के पास लाटूतोली में प्रभावितों के टेंट लगाए हैं। वहीं प्रशासन इसे रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि बताकर अस्थायी व्यवस्था बता रहा है।
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15 जुलाई की आपदा से झलिया गांव के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। लोग गांव के पास बने प्राथमिक स्कूल के भवन और भगवती मंदिर में रह रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावितों को नौ टेंट उपलब्ध कराने के अलावा बिजली के लिए सौर लाइट और पानी की सप्लाई टैंकर से सुनिश्चित की है, लेकिन यहां प्रभावित पूरे परिवार के साथ नहीं हैं। ग्रामीण अभी प्राइमरी स्कूल, मंदिर और कुछ ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ लाटूतोली से 25 किमी दूर लेटीखाल तोक की छानियों में हैं। प्रभावित बचन सिंह, लाल सिंह, भागचंद्र और दलीप सिंह ने कहा कि बारिश के चलते बच्चों के साथ टेंट में रहना मुश्किल है। ऐसे में यदि यहां जल्द टिनशेड का निर्माण हो जाता, तो प्रभावितों को राहत मिल जाती। वहीं जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र दानू का कहना है कि झलिया गांव के 36 परिवार आपदा प्रभावित हैं, लेकिन 12 परिवारों का ही विस्थापन किया गया वह भी अस्थायी रूप से।

लाटूतोली में अस्थायी रूप से विस्थापित परिवारों के लिए लाइट, पानी की अस्थायी व्यवस्था की गई है। राशन की भी व्यवस्था की जा रही है। लाटूतोली रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि है लिहाजा यहां प्रभावितों को केवल अस्थायी रूप से रखा गया है। राजस्व विभाग द्वारा प्रभावितों को जमीन तलाशी जा रही है। अन्यत्र भूमि मिलने पर प्रभावितों को शिफ्ट कर दिया जाएगा।
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-माणिक लाल भेंतवाल, तहसीलदार थराली, चमोली
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