ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
मानसून की दस्तक के साथ ही रिहायशी इलाकों में जलभराव और नदियों के तटों पर बसे लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने तमाम दावे किए, लेकिन महज दो दिन की बरसात में ही दावों की पोल खुलकर सामने आ गई है। कॉलोनियों के बाहर डूब क्षेत्र के बैनर चस्पा किए जा रहे हैं।
बारिश न सिर्फ शहर के लिए आफत बनी है, बल्कि समीपवर्ती गांव भी अछूते नहीं हैं। गुमानीवाला, श्यामपुर, खदरी खड़कमाफ और ठाकुरपुर ग्रामसभा में भी स्थिति कमोवेश ऐसी ही है। ग्रामसभा गौहरीमाफी के लगभग 300 परिवार बीते 12 दिनों से सौंग की बाढ़ से घिरे हुए हैं। संकटग्रस्त हजारों लोगों को डबल इंजन की सरकार आज तक कोई राहत नहीं दे पाई है।
केस-1
ग्रामसभा गौहरीमाफी में सौंग की बाढ़ से ग्रामीणों की रात दिन खौफ के साए में गुजर रहे हैं। खास बात यह है कि ग्रामीण बरसात के पहले से ही गांव में सौंग नदी की बाढ़ के लिए सुरक्षात्मक उपायों की मांग कर चुके थे, लेकिन सरकार, प्रशासन और सिंचाई महकमा सब अनसुनी करते रहे। ग्रामीणों ने करीब चार महीने तक आंदोलन किया था।
केस-2
जलभराव से ग्रस्त तीर्थनगरी स्थित आवास-विकास कॉलोनी के बाशिंदों को बैनर लगाकर बाकायदा कॉलोनी क्षेत्र को बाढ़ग्रस्त कहना पड़ रहा है। उन्होंने बाकायदा बैनर लगाकर उस पर बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में आपका स्वागत है। बैनर पर अंकित है कि कॉलोनी में सड़क मार्ग की बजाय नाव से आना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
केस-3
रायवाला क्षेत्र की प्रतीतनगर ग्रामसभा के पास नेशनल हाईवे से सटी नई बस्ती में एक दर्जन से अधिकारी घरों में बारिश का पानी घुस गया है। घरों में रखा कीमती सामान खराब हो चुका है। स्थानीय निवासी गुड्डू सेमवाल, अनीता पांचाल, बाला देवी, माजिद, हरिओम, राकेश आदि ने बताया कि हाईवे के चौड़ीकरण की वजह से जलभराव हुआ। निर्माणाधीन राजमार्ग के किनारे पर पानी की निकासी के लिए नाला बनाने के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया।
केस-4
बैराज रोड स्थित शिवाजीनगर में भी बारिश के पानी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार को कई परिवारों के घर बारिश के पानी से जलमग्न हो गए। इसके चलते उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय निवासी हरिदास, राजेश ठाकुर और देवेंद्र ने बताया कि राशन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि बारिश के पानी से खराब हो गए हैं। निगम प्रशासन ने मानसून आने से पहले जलभराव से निपटने के दावे किए थे, लेकिन बारिश में यह दावे खोखले साबित हो रहे हैं।