ब्यूरो/अमर उजाला, डोईवाला।
श्रावण शुक्ल पंचमी को नागपंचमी के नाम से जाना जाता है। बुधवार को नागपंचमी के दिन शिवालयों में नागों की पूजा अर्चना की जाएगी। शास्त्रों में नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है। कुंडली में कालसर्प दोष की शांति का सबसे उत्तम दिन शास्त्रों नागपंचमी को माना जाता है। आचार्य पंडित देवेंद्र प्रसाद भट्ट भोगपुर वालों ने बताया कि इस दिन गौ दूध, धान का लावा, सफेद पुष्प और धूप आदि से पूजन किया जाना चाहिए। पूजन के बाद नाग देवता की प्रसन्नता के लिए नवकुल नागाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि मंत्र का जाप करें।
उन्होंने बताया कि कालसर्प दोष को दूर करने के लिए आज के दिन धातु का नाग नागिन का जोड़ा शिवालयों में अर्पित करने पर लाभ मिलता है। नाग पंचमी के दिन दरवाजे के दोनों ओर गाय के गोबर से सर्पों की आकृति बनानी चाहिए। अक्षत, जल, दूध, धूप और नैवेद्य से विधिविधान से पूजन करना चाहिए। पंडित भट्ट ने बताया कि नागों की पूजा से घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है। नागपंचमी के दिन नाग पूजा करने से भगवान शिव अधिक प्रसन्न होते हैं। ग्रंथों में वासुकि नाग जिसको समुद्रमंथन के लिए रस्सी के लिए लाया गया था, के अलावा शेषनाग, तक्षक और कालिया जैसे नागों का वर्णन स्कंद पुराण में है।