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राफ्ट से नदी के आरपार जाने की व्यवस्था से ग्रामीण परेशान

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राफ्ट से नदी के आरपार जाने की व्यवस्था से ग्रामीण परेशान
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
रायवाला। दस दिन से बाढ़ का प्रकोप झेल रहे गौहरीमाफी के प्रभावित परिवारों को शनिवार को भी राहत नहीं मिल पाई है। लिहाजा गांव से बाजार तक उनकी आवाजाही अभी भी पूरी तरह से एसडीआरएफ द्वारा लगाई गई राफ्ट सेवा पर ही निर्भर है। राफ्ट से आने जाने की समय सीमा निर्धारित होने के चलते उन्हें आवागमन के लिए लंबे इंतजार करना पड़ रहा है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश है। वहीं पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बरसात से सौंग नदी की जलस्तर फिर से बढ़ गया है। इससे सौंग नदी की धारा बदलने के राहत कार्य में कोई सफलता नहीं मिल रही है।
गौहरीमाफी गांव में घुसकर बह रही सौंग नदी का जलस्तर शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद फिर बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से धारा मोड़ने के कार्य को झटका लग गया है। हालांकि जेसीबी शनिवार को दिनभर कार्य में जुटी रही। वहीं जलधारा में घिरे ग्रामीण शनिवार को भी आवाजाही के लिए पूरी तरह से राफ्ट पर निर्भर रहे। प्रशासन की ओर से राफ्ट से आवागमन में समय सीमा निर्धारित किए जाने से स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे लोगों में खासा आक्रोश है। उपजिलाधिकारी हर गिरि ने बताया कि सौंग नदी में जलधारा का रुख बदलने का कार्य लगातार जारी है। पहाड़ों में भारी बरसात के चलते सौंग नदी का जलस्तर अचानक फिर बढ़ गया है। इसके चलते कुछ समस्या आ रही है, लेकिन जलधारा मोड़ने का कार्य एक- दो दिन में पूरा करा लिया जाएगा। राफ्ट चलाने की समय सीमा के मामले में ग्रामीणों को हो रही परेशानी के बाबत समाधान निकाला जाएगा।
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स्कूल जाने के लिए सुबह सात बजे घर से निकलते हैं और दोपहर एक बजे लौटते है। इस बीच राफ्ट सुबह 10 से 12 बजे तक चलाई जाती है। इसके अलावा स्कूल से आते समय भी राफ्ट शाम चार बजे चलाई जा रही है। शनिवार को सुबह के समय जलस्तर कम था, तो एक- दूसरे के सहारे जलधारा को पार कर स्कूल पहुचे थे, लेकिन लौटने के समय जलस्तर बढ़ने से राफ्ट का ही सहारा लेना पड़ा।
सिया नेगी, छात्रा गौहरीमाफी नंबर-दो

स्कूल जाने के लिए सही समय पर राफ्ट की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रशासन द्वारा इतने दिनों बाद भी आवाजाही सुगम नहीं कराने से स्कूली बच्चों, महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। ट्रॉली की व्यवस्था की जानी चाहिए।
मेघा राणा, छात्रा गौहरीमाफी नंबर- 2
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मुझे जानकारी नहीं थी कि गांव में पहुंचने के लिए राफ्ट सुबह और शाम को चलाई जा रही है। मेरा घर पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। मैं दो, तीन दिन के लिए काम से बाहर गया था, शनिवार को घर लौटने के लिए तीन घंटे इंतजार करना पड़ा।
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सज्जू दास, ग्रामीण गौहरीमाफी
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वर्ष 1993 में आई आपदा के समय गांव में बाढ़ का पानी से आवागमन बंद हो हो गया था। तब प्रशासन की ओर से व्यवस्था बनाकर तीन दिन के भीतर आवागमन सुचारु करा दिया गया था। जबकि इस बार दस दिन बाद भी प्रशासन राफ्ट के भरोसे ग्रामीणों को सुबह और शाम ही आवागमन करा पा रहा है। प्रशासन तीसरे दिन से ट्रॉली लगाने की बात कह रहा है, लेकिन आज तक यह व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसके चलते प्रभावित परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
भगवती सेमवाल, सामाजिक कार्यकर्ता, गौहरीमाफी
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