ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
सिखों के आठवें गुरु हरकिशन साहिब का प्रकाश पर्व अजीतनगर स्थित गुरुद्वारे में धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में शबद-कीर्तन कर गुरु की महिमा का बखान किया गया। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा में मत्था टेक सुख-समृद्धि की कामना की।
सुखमनी सोसाइटी और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कीओर से आयोजित कार्यक्रम में ज्ञानी सोहन सिंह ने गुरु हरकिशन साहिब के जीवन पर प्रकाश डाला। कहा कि गुरु हरकिशन का जन्म सावन कृष्ण पक्ष नवमी को कीरतपुर साहिब में हुआ था। उनके पिता गुरु हरि राय और माता किशन कौर थीं। गुरु हरकिशन को 1661 में गुरुगद्दी सौंपी गई थी, तब उनकी आयु मात्र पांच वर्ष थी। इसीलिए उन्हें बाल गुरु भी कहा गया है। आठवें गुरु ने तीन वर्ष तक सिखों का नेतृत्व किया और 1664 ई. में सिर्फ आठ वर्ष की उम्र में चेचक के कारण ज्योति-जोत समा गए। गुरु का यह छोटा-सा जीवन अनेक प्रसंगों से भरा पड़ा है, जो बालगुरु के विराट व्यक्तित्व की अद्भुत झांकी दिखा जाता है। हरकिरत सिंह, ज्ञानी कुलवंत सिंह ने गुरु वाणी सुना संगत को निहाल किया।
इस मौके पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गुरजीत सिंह, सचिव हरपाल सिंह, प्रताप सिंह काला, प्रीतपाल सिंह छिब्बर, नरेंद्र सिंह सुखमनी सोसाइटी की मनजीत कौर, धनविंदर कौर, रंजीत कौर, जगजीत कौर, नरेंद्र कौर, हरजीत कौर आदि मौजूद रहे।