ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती ।
परमार्थ निकेतन के संस्थापक स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती की 53वें ब्रह्मनिर्वाणोत्सव पर आयोजित सप्ताहव्यापी श्री रामचरित मानस अखंड पाठ व यज्ञ विधिवत संपन्न हो गया। इसके बाद श्री हनुमान चालीसा पाठ और सद् गुरुदेव पूजन के साथ समाधि मंदिर की दिव्य आरती की गई। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती ने कहा कि गुरु ही शिष्य की भक्ति व मुक्ति के कारण बनते हैं। गुरु हमारे हृदय में परमात्मा के प्रति अनुराग जगाते हैं।
इस मौके पर स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने कहा कि सद्गुरु सामान्य नहीं होते, वह महाचेतना के शक्तिपुंज व परमात्मा के प्रखर प्रतिनिधि होते हैं। बताया कि सद्गुरु जनकल्याण योजना को लेकर धरती पर अवतरित होते हैं और कार्य को पूर्ण कर भगवत धाम वापस लौट जाते हैं। धार्मिक अनुष्ठान में स्वामी विश्वात्मानंद, पं. बनवारी लाल शास्त्री, स्वामी विज्ञानानंद, स्वामी केशवानंद, स्वामी शिवानंद, आश्रम प्रबंधक राम अनंत तिवारी, नरेंद्र बिष्ट, लक्की सिंह, मां आनंदमयी, मनोज मिश्रा, श्यामू शुक्ला, आशू श्रीवास्तव आदि ने शिरकत की।