देवाल। पहाड़ी से लगातार बोल्डर और मलबा आने से झलिया गांव खतरे की जद में है। प्रशासन की ओर से गांव की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम न किए जाने से निराश झलिया के ग्रामीण अब गांव की ईष्ट देवी भगवती के शरण में हैं। गांव के पांच से अधिक परिवारों ने मंदिर में ही शरण ली है, जबकि अन्य चार परिवार स्कूल में रह रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने झलिया गांव के विस्थापन के लिए गांव के पास की भूमि को चयनित किया था, लेकिन भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इसे असुरक्षित माना है। इसके बाद एक बार फिर झलिया गांव के पुनर्वास का मामला लटक गया है।
15 जुलाई की आपदा से झलिया गांव में नौ मकान पूर्ण रूप क्षतिग्रस्त हो गए थे, जबकि पूरा गांव पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन की चपेट में आ गया है। मार्च माह में भी यहां भूस्खलन हुआ था, जिसके बाद प्रशासन ने यहां निरीक्षण कर गांव के पास बचकुड़ी तोक में झलिया गांव के पुनर्वास का निर्णय लिया था। भूगर्भ वैज्ञानिकों की जांच में बचकुड़ी तोक की भूमि को भी सुरक्षित नहीं माना गया है। वहीं आपदा के 18 दिनों बाद भी यहां प्रशासन टेंट और राशन वितरण के अलावा कुछ नहीं कर पाया है। जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र दानू का कहना है कि थक हार कर ग्रामीण अब गांव की ईष्ट देवी भगवती मंदिर में शरण लिए हुए हैं। तहसीलदार माणिक लाल भेंतवाल ने बताया कि गांव के पुनर्वास के लिए अन्यत्र भूमि की खोज शुरू कर दी गई है।