ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश ।
श्रावण मास के नीलकंठ कांवड़ यात्रा के शुरुआती दिनों में ही सफाई व्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। प्राचीन नीलकंठ मंदिर परिसर व मेला क्षेत्र में जगह-जगह पसरे प्लास्टिक कचरे व गंगाजली केन के ढेर इसकी गवाही दे रहे हैं। नीलकंठ धाम की श्रावण मास की कांवड़ यात्रा बीते शुक्रवार से शुरू हो चुकी है। यात्रा के पहले सप्ताह में सोमवार तक चार दिन में ढाई लाख से अधिक शिवभक्त प्राचीन नीलकंठ धाम के दर्शन व जलाभिषेक कर चुके हैं। पौराणिक नीलकंठ शिवालय में जलाभिषेक के लिए तीर्थयात्रियों द्वारा प्लास्टिक की छोटी केन का उपयोग किया जा रहा है। तीर्थयात्रियों द्वारा जलाभिषेक के बाद प्लास्टिक कैन को मंदिर परिसर और आसपास मेला क्षेत्र में फेंका जा रहा है। जिससे जगह जगह प्लास्टिक कचरे का डंप लगने लगा है।
वहीं कांवड़ यात्रा शुरू होते ही नीलकंठ मंदिर के आसपास भिखारियों का जमावड़ा लगने लगा है। भीख मांगने वालों में अधिकांश महिलाएं व बच्चे शामिल हैं, जो धाम के दर्शन के लिए आते और गंतव्य की ओर से लौटते तीर्थयात्रियों को परेशान कर रहे हैं। भिक्षा नहीं मिलने पर वह काफी दूर तक लोगों का पीछा करते हैं। ऐसे में शिवभक्तों को भिक्षुओं से परेशान होना पड़ रहा है, जिनसे पीछा छुड़ाना तीर्थयात्रियों के लिए मुश्किल हो रहा है।