थराली। आपदा प्रभावितों को मुआवजा देने आदि की मांग के लिए थराली जागरूक मंच ने तहसील में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि आपदा से रास्ते बंद हैं, प्रभावितों ने टेंट में शरण ली हुई है लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं की जा रही है। यदि जल्द आपदा प्रभावित को मुआवजा और क्षेत्रों में प्रभावितों की मदद नहीं की तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
पूर्व ब्लाक प्रमुख और जागरूक मंच के संयोजक सुशील रावत के नेतृत्व में आपदा प्रभावितों और जागरूक मंच के सदस्य तहसील परिसर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रभावितों ने कहा कि 15 जुलाई को थराली के सोल पट्टी में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ। यहां दस दुकानें, दो मकान सहित कई टैक्सी वाहन, कारें, बाइक बह गई थीं। रतगांव में वैकल्पिक पुल बनाते वक्त एक व्यक्ति गदेरे के उफान में बह गया था, जिसका आज तक पता नहीं लग पाया। सड़कें और रास्ते 16 दिन बाद भी नहीं खुले, जिससे आपदा प्रभावितों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। प्रशासन और सरकार ने प्रभावितों को मुआवजा देना तो दूर फौरी राहत राशि भी नहीं दी। यही हाल आपदा प्रभावित क्षेत्र कुलिंग, वाण, झलिया सहित आसपास के गांवों का है। यहां 16 से अधिक परिवार स्कूल और टेंट में शरण लिए हुए हैं। वाण और कुलिंग में सड़कें कब खुलेंगी इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में प्रतिदिन सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक तहसील परिसर में धरना दिया जाएगा। पहले दिन धरना देने वालों में मंच के सह संयोजक संदीप पटवाल, कुंवर सिंह रावत, राजेंद्र सिंह गुसाईं, महेश उनियाल, हेमचंद्र, जयशंकर, नरेंद्र सिंह, मोहन प्रसाद आर्य, कमलेश और कृपाल सिंह आदि शामिल थे।