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12 साल में नहीं बन पाया नीलकंठ बाईपास मार्ग

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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कांवड़ यात्रा में प्राचीन श्री नीलकंठ धाम आने वाले दर्शनार्थियों को इस साल भी जाम से जूझना पड़ेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित बाईपास मार्ग मंजूरी के 12 साल बाद भी नहीं बन पाया है। दशकभर से अधिक समय से प्रस्तावित नीलकंठ बाईपास मार्ग का निर्माण अब भी लटका हुआ है। दरअसल, शिवालय में वर्ष भर श्रद्धालुओं की आमद बनी रहती है। अकेले श्रावण मास में यहां दर्शन के लिए आने वाले यात्रियों की संख्या करीब 50 लाख है।
यात्राकाल में लगने वाले जाम से निजात के लिए वर्ष 2006 में यहां 12 किलोमीटर मार्ग के लिए करीब 1.66 करोड़ की वित्तीय मंजूरी मिली थी। तीन साल विलंब से जून- 2009 में मार्ग का निर्माण बामुश्किल शुरू हो पाया। 12 किमी. मार्ग बने करीब छह साल हो चुके हैं, बावजूद इसके श्रद्धालुओं को अभी तक बाईपास की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कारण मार्ग को आज तक लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे से नहीं जोड़ा गया है, जिसके चलते डेढ़ करोड़ से अधिक खर्च होने के बाद भी धाम के दर्शन को आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को आवागमन की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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आठ किमी. सड़क मंजूर, मगर बनाई नहीं
वर्ष 2006 में घाईकल, सिमलखेत गांवों के लिए राज्य सरकार की ओर से आठ किमी. मार्ग को मंजूरी मिली थी, जिसको नीलकंठ बाईपास मार्ग से लिंक किया जाना था। मगर लोक निर्माण विभाग आज तक इस मार्ग का निर्माण शुरू ही नहीं करा पाया। लिहाजा मार्ग का लाभ न तो स्थानीय ग्रामीणों को भी नहीं मिल पा रहा है।

बाईपास बनाने को 5 किमी. मार्ग की पड़ेगी जरूरत
यदि पीडब्ल्यूडी घाईकल-सिमलखेत गांवों के लिए स्वीकृत मोटर मार्ग का निर्माण करती है, तब नीलकंठ बाईपास मार्ग को लक्ष्मणझूला-कांडी एनएच से जोड़ने के लिए पांच किमी. अतिरिक्त मार्ग की जरूरत होगी। इस पैच के बनने से तीर्थयात्रियों को नीलकंठ धाम के आवागमन को बाईपास मार्ग की सहूलियत मिल पाएगी।
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कोट्स
नीलकंठ बाईपास मार्ग को लक्ष्मणझूला-कांडी हाईवे से जोड़ने की योजना है, जिसके लिए 2006 में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत स्वीकृत आठ किमी. सिमलखेत-घाईकल मार्ग से जोड़कर रत्तापानी में मुख्य मार्ग से मिलाया जाएगा। इस मार्ग के तीन किमी. हिस्से का कार्य माह भर में शुरू करा दिया जाएगा। शेष भाग के लिए रिवाइज इस्टीमेट और पांच किमी. अतिरिक्त मार्ग का प्रस्ताव तैयार कर जल्द शासन को भेजा जाएगा।
- सत्य प्रकाश राठौर, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी।
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