ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
सदी के सबसे लंबे समयांतराल के चंद्रग्रहण के चलते शुक्रवार को दोपहर बाद सूतक लगने पर तीर्थनगरी के सभी मंदिरों के कपाट बंद हो गए। इस दौरान ग्रहणकाल समाप्त होने तक लोगों ने मंदिरों समेत विभिन्न स्थानों पर भजन-कीर्तन, यज्ञ आदि आयोजन कर भगवान का गुणगान किया। दोपहर करीब दो बजे सभी मंदिरों के कपाट सूतक लगते ही ग्रहणकाल के लिए बंद कर दिए गए। देर रात इस सदी का सबसे लंबा खग्रास चंद्रग्रहण 11 बनकर 55 मिनट पर शुरू होकर 3 बजकर 51 मिनट पर संपन्न हुआ।
उत्तराखंड ज्योतिष रत्न डॉ. चंडी परसाद घिल्डियाल ने बताया कि मंत्र, यंत्र साधना की दृष्टि से यह ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण रहा। बताया कि ऐसे कई महत्वपूर्ण यंत्रों को ग्रहणकाल में सिद्ध करने से लोगों को सभी मनोरथों की प्राप्ति होती है। बताया गया कि साफ सफाई के बाद ब्रह्ममुहूर्त में सभी मंदिरों के कपाट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे।