संदीप थपलियाल
श्रीनगर। पीजी (एमडी/एमएस) के लिए हाथ पैर मार रहे राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर की एमबीबीएस मान्यता खतरे में हैं। इसकी वजह फैकल्टी (संकाय सदस्य/विशेषज्ञ चिकित्सक) की लगभग 40 फीसदी की कमी और संसाधनों का अभाव है। इस साल संस्थान में एमबीबीएस की मान्यता के नवीनीकरण के लिए एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) का दौरा हो सकता है। ऐसे में एमबीबीएस की मान्यता छिन सकती है।
कुछ समय पूर्व देहरादून से आयी केंद्रीय संसदीय समिति को भी यह रिपोर्ट मिली थी, कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की 40 फीसदी कमी है। इसके अलावा गत 9 जुलाई को एमसीआई ने संस्थान को एक ओर पत्र भेजा है, जिसमें कालेज की कमियां दूर करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में पूछा गया। वर्ष 2008 में मंजूर श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस कोर्स को एमसीआई ने वर्ष 2013 में मान्यता दी थी। तब कॉलेज में फैकल्टी की कमी और संसाधनों के अभाव को दूर करने के लिए उत्तराखंड शासन ने एमसीआई को कमियों को दूर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इन 5 सालों में स्थिति सुधरने के बजाय और खराब हो गई। हर साल फैकल्टी संस्थान को छोड़ रही है। वर्तमान में संस्थान के 24 विभागों में एक भी एमसीआई के मानकों को पूरा नहीं कर रहा है। इसके अलावा सीनियर रेजीडेंट (एसआर) डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है। साथ ही सीटी स्कैन मशीन, इंसिरेटर, डायलिसिस व वेंटिलेटर खराब पड़े हुए हैं। यदि इन हालातों मेें एमसीआई मेडिकल कॉलेज श्रीनगर का दौरा करती है, तो एमबीबीएस कोर्स की मान्यता पर संकट पड़ना तय है।
एमसीआई की चेतावनी का नहीं होता असर
श्रीनगर। एमसीआई अपने हर दौरे में संस्थान की कमियां गिनाती हैं, लेकिन इनका निराकरण नहीं हो पाता है। गत वर्ष मई माह में प्री-पीजी एसेसमेंट के लिए आई एमसीआई ने मुख्यतया 23 बिंदुओं की ओर ध्यान खींचते हुए एक माह में कमियां दूर करने के लिए कहा था। दरअसल, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने 14 विभागों में पीजी (एमडी/एमएस) के लिए आवेदन किया था। इसके बाद दो बार और निरीक्षण हुआ, लेकिन हर बार कमियों चलते पीजी की अनुमति नहीं मिल पाई।
43 संकाय सदस्यों की जरूरत
श्रीनगर। फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एक बार फिर तत्काल विशेष चयन प्रक्रिया चलाने के लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। ताकि एमसीआई के दौरे से पहले मानक पूरे कर लिए जाए। कॉलेज में 43 संकाय सदस्यों की कमी है। इसमें 6 प्रोफेसर, 14 एसोसिएट प्रोफेसर और 23 सहायक प्रोफेसरों के पद शामिल हैं।
---अब हर माह फैकल्टी के लिए इंटरव्यू होंगे। फैकल्टी की कमी दूर करने के प्रयास चल रहे हैं। प्रो. आशुतोष सयाना, निदेशक उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा