थराली। तहसील के चार से अधिक कस्बे दस दिनों से पानी को तरस रहे हैं। स्थिति यह है कि लोग प्राकृतिक गदेरों और हैंडपंपों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने जल्द विभाग से पेयजल आपूर्ति कराने की मांग की।
तहसील मुख्यालय राड़ीबगड़ सहित थराली बाजार, कोटडीप, बेरकांडे की दो हजार से अधिक की आबादी दस दिनों से पेयजल संकट से जूझ रही है। इन कस्बों में पेयजल आपूर्ति प्राणमति गदेरे से होती है। 15 जुलाई को भारी बारिश के चलते यहां भूस्खलन से सड़क और पेयजल लाइन टूट गई थी। तब से विभाग यहां पेयजल लाइन सुचारु करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पाया है। प्रेमबल्लभ, उमेश पुरोहित, दयानंद बहुगुणा और सुशील प्रसाद आदि का कहना है कि पानी नहीं आने से गदेरों और हैंडपंपों से दूषित पानी भरना पड़ रहा है। हैंडपंपों के हाल यह है कि एक किमी दूर जाने के बाद एक गैलन पानी भरने में एक घंटा से भी अधिक समय लग रहा है। जलसंस्थान के अवर अभियंता कृष्णकांत ने बताया कि प्राणमति में लोनिवि सड़क बना रही है। सड़क बनने के बाद ही पेयजल लाइन ठीक हो पाएगी। जल्द वैकल्पिक व्यवस्था कर दी जाएगी।