कर्णप्रयाग। बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और ऑलवेदर रोड परियोजना के मुआवजा वितरण प्रणाली को लेकर प्रभावितों में असंतोष है। प्रभावितों का कहना है कि प्रशासन मुआवजा असली भूमि या भवन स्वामी (खातेदार) को नहीं बल्कि खातेदार के साथ खतौनी में सभी सहखातेधारकों को भी वितरित कर रहा है। ऐसे में भूस्वामी को मुआवजे की पूरी राशि नहीं मिल पा रही है। वहीं ऑल वेदर परियोजना में दुकानों और मकानों का मुआवजा भी कम बनाने की शिकायत प्रभावित कर रहे हैं। प्रभावित अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
रेल परियोजना से कर्णप्रयाग और जिलासू तहसील के करीब 1200 से अधिक परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जिनके लिए 147 करोड़ का मुआवजा स्वीकृत है। प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष गजेंद्र नयाल का कहना है कि प्रशासन ने खाताधारक नहीं बल्कि अंशधारक का मुआवजा बनाया है। इसमें जिसकी हिस्से की जमीन नहीं जा रही है उसका भी मुआवजा प्रशासन दे रहा है। ऐसे में असली प्रभावित को मुआवजे की राशि कम मिल रही है, जिसका प्रभावित विरोध कर रहे हैं। वहीं ऑल वेदर रोड के प्रभावित मुकेश डिमरी सहित अन्य ने कहा कि प्रभावित होने वाले मकानों और दुकानों का मूल्यांकन कम किया गया है, जिसे ठीक कराने के लिए प्रभावित कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
कोट
नियमानुसार रेल परियोजना और ऑल वेदर परियोजना का मुआवजा अंशधारक (भूमि के सभी खातेधारकों) के हिसाब से बांटा जा रहा है। इसी हिसाब से मुआवजा भी स्वीकृत हुआ है। रेल परियोजना में अब तक 67 करोड़ का मुआवजा वितरित किया जा चुका है, जबकि ऑल वेदर का जल्द शुरू किया जाएगा। हालांकि मामले में प्रभावितों की शिकायत उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। शासन से निर्देश मिलने पर ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - जीआर बिनवाल, उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग चमोली।