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झुलसा रोग की चपेट में अदरक की फसल

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ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
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बरसात शुरू होते ही जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में उगाए जाने वाली अदरक की फसल झुलसा और सड़न रोग की चपेट में है। अब तक रोग की चपेट में आकर 20 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है। काश्तकारों को आर्थिकी का संकट सताने लगा है।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में 800 से 900 हेक्टेयर कृषि भूमि पर अदरक की खेती की जाती है। यहां के अदरक की हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बरेली, हरियाणा की मंडियों में खासा डिमांड रहती है। लेकिन इस साल बरसात शुरू होने के साथ ही फसल रोग की चपेट में आ गई है। इससे किसानों के चेहरे पर चिंता के बादल साफ देखे जा सकते हैं। काश्तकार भाव सिंह, पूर्ण सिंह, नारायण सिंह तोमर आदि का कहना है कि हर साल सितंबर माह के अंत में रोग का प्रकोप देखने को मिलता है, लेकिन इस साल जुलाई माह में ही फसल रोग की चपेट में आ गई है। काश्तकारों ने कच्चे में ही फसल को बाहर निकालना शुरू कर दिया है। कहा फसल के लिए काश्तकारों ने बैंकों से महंगा लोन लिया हुआ है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अकेले पीएनबी साहिया से ही लगभग नौ करोड़, एसबीआई साहिया से पांच करोड़ और उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से करीब पांच करोड़ रुपये का कृषि ऋण अदरक की फसल पर लिया गया है।
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ऐसे करें फसलों का बचाव
अपर उद्यान अधिकारी डॉ. एमपी शाही ने बताया कि जुलाई में ही फसल पर रोग लगना चिंता का विषय है। 500 लीटर पानी में कॉपर और स्टोफ्ट्रासाइकिल की 10 ग्राम मात्रा को मिलकार छिड़काव करने से फसल को बचाया जा सकता है।
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