ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा को शुरू होने में महज तीन दिन शेष रह गए हैं। तीर्थनगरी में कांवड़ियों की आमद शुरू हो चुकी है। बावजूद इसके अभी तक मेला क्षेत्र में मुकम्मल व्यवस्थाएं नहीं जुट पाई हैं। खासकर मेला क्षेत्र में दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति बेहद खराब है, जिसके कारण लाखों शिवभक्तों को यात्रा में हिचकोले खाकर यात्रा करनी होगी।
शुक्रवार गुरु पूर्णिमा पर्व से इस साल की श्रावण मास की नीलकंठ कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। इसके बावजूद प्राचीन नीलकंठ शिवधाम जाने वाले मार्गों पर अभी तक व्यवस्थाएं मुकम्मल नहीं हो पाई हैं। इनमें खासकर लक्ष्मणझूला-कांड़ी नेशनल हाईवे पर पीपलकोटी तक का पैच कई स्थानों पर अत्यधिक खराब है। राजमार्ग के करीब 16 किमी. लंबे इस पैच में आधा दर्जन स्थानों पर 150 से 300 मीटर तक में भारी गड्ढे बने हुए हैं।
यह स्थिति तब है जबकि यह मार्ग तीर्थनगरी को पौराणिक नीलकंठ धाम को जोड़ने वाला यह एकमात्र यातायात मार्ग है। राजमार्ग पर खैरखाल, जुड्डा गांव के समीप पुश्ते क्षतिग्रस्त हैं। घट्टूगाड़ से खैरखाल के बीच एक स्थान पर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है, जिससे लगातार मलबा हाईवे पर गिर रहा है। लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन की ओर से लाखों श्रद्धालुओं से जुड़ी कांवड़ यात्रा के मद्देनजर मार्ग पर न तो गड्ढों पर स्थायी पैचवर्क किया है और न ही पुश्तों की मरम्मत करना ही मुनासिब समझा है। जिन स्थानों पर पुश्ते क्षतिग्रस्त हैं, वहां पर हाईवे अत्यधिक संकरा हो गया है, ऐसे में यात्राकाल में जुटने वाली भीड़भाड़ में मार्ग पर दुर्घटनाओं का अंदेशा भी बढ़ गया है।
उधर, यही स्थिति बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग की है। हाईवे पर कुंभमेला बस पार्किंग तिराहे से लेकर तपोवन तक कई जगह भारी गड्ढे बने हुए हैं, जिसके चलते तीर्थयात्रियों को कांवड़ यात्रा में परेशान होना पड़ेगा। बावजूद इसके लोकनिर्माण विभाग हाईवे डिवीजन श्रीनगर ने यात्रा के लिए मार्ग मरम्मत नहीं कराई है। नीलकंठ मंदिर समिति के सचिव धन सिंह राणा, सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा आदि ने बताया कि कांवड़ यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर पौड़ी जिला प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। जिसके चलते लोक निर्माण विभाग समेत अन्य कई महकमे मेला व्यवस्थाएं जुटाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।