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राष्ट्रीय दलों की नीति से हाशिए पर गैरसैंण:उक्रांद

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गैरसैंण। ब्लाक सभागार में उक्रांद के 39वें केंद्रीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। अधिवेशन में उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय दलों की हाईकमान नीति के कारण आज गैरसैंण हाशिए पर खड़ा है। राज्य आंदोलन की भावना रही गैरसैंण को राजधानी बनाने के लिए आज एक और राज्य आंदोलन की जरूरत है।
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ब्लाक सभागार में मंगलवार को शुरू हुए उक्रांद के केंद्रीय अधिवेशन में दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि अस्सी के दशक में पहाड़ी क्षेत्र से लगातार हो रहे पलायन, सुविधाओं और रोजगार के अभाव के कारण अलग पहाड़ी प्रदेश की कल्पना की गई। वर्ष 1994 में शुरू हुए आंदोलन और शहीदों की बलिदान के बाद 2000 में अलग राज्य बना, लेकिन राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस ने गैरसैंण को हाशिए पर खड़ा कर दिया है। उक्रांद नेताओं ने कहा कि प्रदेश में मूल निवास की कट ऑफ डेट 1950 होनी चाहिए। पहाड़ में पलायन, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़कें, शिक्षा और आपदा प्रबंधन पर ठोस रणनीति बननी चाहिए। डबल इंजन की सरकार को घेरते हुए उक्रांद नेताओं ने कहा कि पहाड़ में आज विकास का पहिया जाम हो गया है। इस दौरान दल के सभी जिलों के अध्यक्षों ने वार्षिक प्रगति रिपोर्ट अधिवेशन में रखी। अधिवेशन को बीडी रतूड़ी, पूर्व अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार, नारायण सिंह जंतवाल, जगदीश गुलानी, देवेश्वर भट्ट, लक्ष्मण सिंह, केंद्रीय प्रचार मंत्री अर्जुन सिंह, मुख्य प्रवक्ता सतीश सेमवाल, जय प्रकाश उपाध्याय, केंद्रीय कार्यालय प्रभारी विजेंद्र रावत, डीके पाल, सरिता पुरोहित, धर्मेंद्र कौशिक, दीपक रावत और राकेश राजपूत आदि ने संबोधित किया।
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