ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
स्वीकृति के आठ साल बाद भी दांवापुल-मिंडाल मोटर मार्ग डामरीकरण की राह ताक रहा है। जिसके चलते आधा दर्जन गांव की राह मुश्किल भरी बनी हुई है। बरसात में पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। ऐसे में लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
वर्ष 2010-11 में साढ़े तीन किमी लंबे दांवापुल-मिंडाल मोटर मार्ग के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन विभाग ने कटिंग करने के बाद सड़क की ओर मुड़ कर नहीं देखा। अब देख-रेख के अभाव में सड़क बदहाल हो गई है। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में दुपहिया वाहन चालकों के लिए सड़क से गुजरना तक मुश्किल हो जाता है। कई बार चौपहिया वाहन भी बीच रास्ते में ही कीचड़ में फंस जाते हैं। स्थानीय ग्रामीण मोहन सिंह नेगी, सुरेश, मन सिंह, सचिन, वीरेंद्र नेगी, मुकेश नेगी, संतराम, सरदार सिंह, चमन सिंह, सब्बल सिंह, मेहर सिंह आदि का कहना है कि दांवापुल-मिंडाल मोटर मार्ग से जोगयो, कुराड़, खनाड़, सिचाड़, समोग, मंझगांव की आबादी जुड़ी हुई है। मरम्मत के अभाव में कई जगह पर मार्ग संकरा हो गया है। लोगों को जान जोखिम में डाल सफर करना पड़ता है, वहीं संपर्क करने पर लोनिवि चकराता के अधिशासी अभियंता बीडी भट्ट ने फोन नहीं उठाया।