ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
श्री अनंतेश्वर महादेव मंदिर बाबूगढ़ में चल रही शिव पुराण कथा के सातवें दिन बाल व्यास प्रमोद चमोली ने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले बेल पत्र के महत्व को समझाया। कहा भगवान शिव 100 कमल चढ़ाने से जितने प्रसन्न होते हैं उतने ही प्रसन्न वह एक नीलकमल चढ़ाने से होते हैं। वहीं, एक बेल पत्र 1000 नीलकमल के समान है। शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
सृष्टि की रचना की व्याख्या करते हुए कि ब्रह्मा इस सृष्टि के रचियता हैं, विष्णु पालनकर्ता और शिव विनाशक हैं। शिव के विनाशक होने का अर्थ सृष्टि के विनाश से नहीं, बल्कि सृष्टि से पाप के विनाश करने से है। शिव पाप को समाप्त कर संसार का नवसृजन करते हैं। इस मौके पर चंदन सिंह सजवाण, शंभू प्रसाद सेमवाल, चंडी प्रसाद ममगाई, राजेंद्र सिंह, एसवीर नकोटी, अर्जुन, संजीव चौहान, डॉ. सुभाष चंबेल, शांती जोशी, रेखा थपलिया, रजनी सकलानी, गौरी देवी, सुलोचना देवी, प्रमिला तोमर, अंजू, रेखा रावत, सावित्री तड़ियाल, भारती तड़ियाल आदि मौजूद रहे।