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न पहाड़ चढ़ी बसें और न शहर में चले ऑटो-टैंपो

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न पहाड़ चढ़ी बसें न शहर में चले विक्रम-ऑटो
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- चक्काजाम से चारधाम यात्री व मुसाफिरों की दिन भर हुई फजीहत
- सवारी वाहनों के इंतजार में घंटों चौक-चौराहों पर खड़े रहे लोग

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के देशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर शुक्रवार को तीर्थनगरी में पूर्ण तौर पर चक्काजाम रहा। इस दौरान विक्रम- ऑटो, टैक्सी वाहन और चारधाम यात्रा व अन्य पर्वतीय रूटों पर निजी परिवहन कंपनियों की बसों का संचालन ठप रहा। इसके साथ ही मालवाहन वाहनों के पहिये भी जाम रहे। शहर में नटराज चौक, घाट चौक, दून तिराहा, चंद्रभागा ब्रिज तिराहा, चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड और कोयलघाटी आदि स्थानों पर दिन भर लोग सवारी वाहनों का इंतजार करते नजर आए।
केंद्र सरकार की ओर से रोजाना यातायात नियमों के बदलाव करने से नाराज परिवहन व्यवसायियों ने विभिन्न मांगों को लेकर रोष जताया। इस दौरान सुबह से लेकर शाम तक परिवहन निगम की बसों को छोड़कर अन्य कोई भी सवारी व मालवाहक वाहन नहीं चला। जिससे लोकल सवारी वाहनों के नहीं चलने से स्थानीय लोगों व तीर्थभ्रमण के लिए आए पर्यटकों को मुश्किलें पेश आई। साथ ही चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी फजीहत झेलनी पड़ी।
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चक्काजाम से पहाड़ी रूटों के मुसाफिरों को ज्यादा दिक्कतें पेश आई। उन्हें सफर के लिए टैक्सी-मैक्सी वाहनों का संचालन भी नहीं होने से दुश्वारियां झेलनी पड़ी। इस दौरान एम्स में उपचार के लिए पहुंचे लोगों को भी सवारी वाहन नहीं मिल सके। चक्काजाम से सिर्फ लोकल मुसाफिर ही नहीं, बल्कि चारधाम दर्शन को देश-दुनिया से रोटेशन के वाहनों में सफर करने पहुंचे तीर्थयात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ी। नीलकंठ धाम के दर्शन व जलाभिषेक के लिए समीपवर्ती जनपदों और अन्य राज्यों से पहुंचे शिवभक्तों को भी पैदल मार्ग से मंदिर तक पहुंचना पड़ा।

रोडवज बसों से मिली राहत
देशव्यापी चक्काजाम के बीच रोडवेज बसों के नियमित संचालन से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन सवारियों के अत्यधिक दबाव के चलते बसें कम पड़ती नजर आई। कई स्थानों पर लोगों में बस में बैठने के लिए आपाधापी मचती दिखी। हालांकि, अन्य वाहनों की हड़ताल के चलते लोगों को रोडवेज बसों के लिए चलने से काफी सुकून भी मिला।

रिक्शे वालों ने काटी चांदी
शुक्रवार को अन्य सवारी वाहनों के चक्काजाम के चलते शहर के रिक्शे चलाने वालों ने खूब चांदी काटी। इस दौरान उन्होंने ऋषिकेश से मुनिकीरेती तक जाने वाले मुसाफिरों को ले जाने के लिए प्रति सवारी 50 रुपये तक वसूले। देश-विदेश से तीर्थनगरी घूमने पहुंचे लोगों को मजबूरी में रिक्शा चालकों को निर्धारित किराए से कई गुना अधिक रकम चुकानी पड़ी। बावजूूद इसके इस पर निगरानी करने वाले मौके से नदारद रहे।

चक्काजाम से जरूरी काम नहीं हो सके
दो घंटे से चंद्रभागा पुल पर वाहनों के इंतजार में खड़ा हूं, शिवपुरी तक जाना है। सुबह जरूरी काम से ऋषिकेश आया था, लेकिन वापस जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल पा रहा है।
- राम सिंह, शिवपुरी निवासी

हरिद्वार से ऋषिकेश आने में चार घंटे लग गए। सुबह बस के इंतजार में चंडीघाट पुल पर इंतजार करते-करते दोपहर हो गई। बड़ी मुश्किल से अब ऋषिकेश पहुंच पाई हूं, और अब यहां भी ऑटो नहीं मिल पा रहे हैं।
- शिवानी थपलियाल, यात्री कोटद्वार

कोटद्वार से ऋषिकेश आया था, लेकिन वाहनों की मारामारी के चलते रोडवेज की बस में खड़े-खड़े सफर करना पड़ा। बड़ी मुश्किल से ऋषिकेश तक गाड़ी मिल पाई है, बस अड्डे से पैदल ही जाना पड़ रहा है। बड़ी मुश्किल है भाई।
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- मनोज, यात्री कोटद्वार

ऋषिकेश घूमने के लिए आए थे, लेकिन पता चला कि हड़ताल है, यहां से ऑटो नहीं मिल पा रहे हैं। पांच किलोमीटर से पैदल चल कर आ रही हूं।
- सुषमा, यात्री

ऋषिकेश घूमने के लिए आए थे, लेकिन यहां कोई भी लोकल सवारी वाहन नहीं चल रहा है। लिहाजा, पैदल ही विभिन्न पर्यटक स्थलों को देखने के लिए जाना पड़ रहा है। काफी दिक्कत हुई है। प्रशासन को अतिरिक्त इंतजाम करने चाहिए थे।
- दीपक, यात्री
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