- एक सप्ताह से बंद है संचालन, त्यूनी, चकराता और साहिया में खड़ी हैं एंबुलेंस
- खराब हालत के कारण पायलटों ने संचालन से खींचे हाथ, मरीज हो रहे परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी/साहिया।
प्रदेश को मिली नई एंबुलेंसों का संचालन जहां विधिवत उद्घाटन के फेर में अटका हुआ है। वहीं पहाड़ों की सड़कों पर पहले से दौड़ रही एंबुलेंस मेंटीनेंस के अभाव में दम तोड़ने लगी हैं। आलम यह है कि जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में एक सप्ताह से जीवनदायिनी कही जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा के पहिए थमे हुए हैं। वाहनों की खराब हालत के कारण पायलटों ने इनके संचालन से पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए हैं। परिजनों को गंभीर मरीजों और प्रसूताओं की जान खतरे में डाल निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। मानसून काल जैसे संवेदनशील समय में जौनसार-बावर की सभी एंबुलेंसों के पहिए थमने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जनजातीय क्षेत्र में वर्तमान में तीन 108 एंबुलेंस हैं। इनको त्यूनी, चकराता और साहिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात किया गया है, लेकिन लंबे समय से विभाग ने इन एंबुलेंस का मेंटीनेंस नहीं कराया है। इस कारण इन वाहनों के टायर पूरी तरह से घिस चुके हैं। मेंटीनेंस के अभाव में कई बार एंबुलेंस बीच रास्ते में ही बंद हो जाती है। खस्ताहालत वाहनों के संचालन से पायलटों के हाथ खींच लेने से गंभीर रोगियों की जान पर बन आई है। बरसात के मौसम में पहाड़ के सर्पीले और खतरनाक रास्तों में इन वाहनों को चलाना खतरों से खाली नहीं है।
यह हाल तब है जब विभाग के पास 61 नई एंबुलेंस हैं। इनका विधिवित उद्घाटन नहीं होने के कारण अब तक यह एंबुलेंस प्रदेश की सड़कों पर नहीं दौड़ सकी हैं। विभाग का साफ कहना है कि उद्घाटन के बाद ही इन एंबुलेंस को प्रदेश की सड़कों पर उतारा जाएगा।
वहीं स्थानीय निवासी प्रेम कुमार, प्रदीप कुमार, विजयपाल आदि का कहना कि आपदा के हिसाब से पहाड़ बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में मानसून काल में एंबुलेंस के पहिए थमने से लोगों की दिक्कतें बढ़ गई है। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को जान जाखिम में डाल अस्पताल तक पहुंचाना पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि जल्द ही एंबुलेंस का संचालन शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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70 प्रतिशत एंबुलेंस खस्ताहाल
प्रदेश में 15 मई 2008 को दस गाड़ियों के साथ 108 एंबुलेंस सेवा की शुरूआत हुई थी। लेकिन वर्तमान में पूरे प्रदेश में 139 एंबुलेंस संचालित हैं। इन एंबुलेंस में से कई वाहन ऐसे हैं जो अपनी निर्धारित सीमा से दुगना सफर तय कर चुके हैं। अमूमन एक लाख किमी चलने के बाद यह वाहन अनफिट हो जाते हैं। लेकिन प्रदेश के बेड़े में शामिल कई एंबुलेंस ऐसी हैं जो तीन लाख किमी से अधिक का सफर तय कर चुुकी हैं। जिस कारण जीवनदायिनी कही जाने वाली 108 एंबुलेंस में भी मरीजों की जान को खतरा बना रहता है।
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एंबुलेंस के विधिवत उद्घाटन की रूप-रेखा तैयार की जा रही है। जल्द ही इन एंबुलेंस को प्रदेश की सड़कों पर उतारा जाएगा।
टीसी पंत स्वास्थ्य महानिदेशक