कर्णप्रयाग। केदारनाथ के रामबाड़ा की तर्ज पर सोलपट्टी का केंद्र बिंदु और बाजार ढाडरबगड़ को आपदा नक्शे से मिटा ले गई। रविवार शाम जो बाजार पूरी तरह गुलजार था, वहां सोमवार सुबह मलबा, बोल्डर, खाई और पत्थर ही थे। यहां बनी दुकानें, सड़क, रास्ते सब चंद पलों में इतिहास बन गया। आपदा ने यहां कई युवाओं का रोजगार छीन दिया। पिंडर घाटी की सबसे बड़ी लोकल मंडी रूप में रही इसकी पहचान आने वाले समय में कब लौटेगी, यह बड़ा सवाल बन गया है।
ढाडरबगड़ कस्बा सोल पट्टी के गांवों की आर्थिकी का एक मुख्य केंद्र था। यहां पट्टी के दर्जनों गांवों में पैदा होने वाले आलू और चौलाई की लोकल मंडी लगती थी तो रतगांव, गेरूड़, कोलपुड़ी, घुम्मड़, रणकोट सहित आस पास के गांवों के ग्रामीणों के नमक, तेल सहित रोजमर्रा के सामान का बाजार भी ढाडरबगड़ था। रविवार रात्रि को बादल फटने से उफनाया किचगाड़ गदेरा ढाडरबगड़ के लिए काल बनकर आया। सोमवार सुबह यहां करीब 300 मीटर जगह में बसे बाजार की जगह केवल मलबा था। पिछले दस वर्षों से यहां मेडिकल स्टोर चलाने वाले कैलाश चंद्र चंदोला भी आज बेरोजगार हो गए। दिनेश फर्स्वाण, मुकेश सिंह पुत्र इंद्र सिंह और मुकेश सिंह पुत्र बलवंत सिंह की टैक्सी बाढ़ की भेंट चढ़ गई। तीनों ने बैंक से ऋण लेकर टैक्सियां खरीदी थी और यही उनकी आजीविका का जरिया भी थी। रोज ढाडरबगड़ से थराली और शाम को वापस गांव पहुंचकर परिवार का भरण पोषण करने वाले वाहन चालकों के सामने अब रोजगार का संकट पैदा हो गया है। यहां चाय की दुकान चलाने वाले वीरेंद्र सिंह और मदन सिंह को भी आजीविका की चिंता सता रही है।