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श्रावण मास आज से, भोले के दर्शनां को जुटेंगे भक्त

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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सौर माह के अनुसार पहला सोमवार आज शुरू हो रहा है। सूर्य के कर्क राशि पर जाते ही सोमवार से भगवान शंकर का प्रिय मास श्रावण मास प्रारंभ हो जाएगा। जप, तप साधना की दृष्टि से यह महीना चार्तुमास्य का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉ. सीपी घिल्डियाल के अनुसार यद्यपि अभी आषाड़ मास का शुक्ल पक्ष चल रहा है, मगर सूर्य की गति की गणना अनुसार श्रावण मास सूर्य के चंद्रमा की राशि कर्क पर आते ही शुरू हो जाता है। जबकि चांद्रमास को मानने वालों के लिए 28 जुलाई से श्रावण मास आरंभ होगा। लिहाजा चांद्रमास को मानने वालों का पहला सोमवार 30 जुलाई को होगा।
ज्योतिष मर्मज्ञ डॉ. घिल्डियाल ने बताया कि सूर्य आत्मा व चंद्रमा मन का कारक है। जब आत्मा का मन पर प्रभाव होता है, तो विवेक रूपी नेत्र जिसे वेद शिव का त्रिनेत्र तीसरा नेत्र भी कहते हैं जागृत होता है, और जीवात्मा मोक्ष की तरफ बढ़ती है। इसीलिए सृष्टि के संहारकर्ता शिव के मस्तक पर जो चंद्रमा है, वह इस महीने सूर्य के प्रभाव में रहने से प्राणी मात्र की साधना को सफल करने में मददगार सिद्ध होता है।
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उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा 28 जुुलाई से प्रारंभ होगी, उक्त तिथि से श्रावण का पक्ष भी आरंभ होता है। सोमवार का व्रत करने वालों को 16 जुलाई से ही व्रत रखने चाहिए। श्रद्धालुओं को बिल्वपत्र, गंगाजल, दूध, घी, पंचगव्य, सफेद फूलों से भगवान शिव की पूजा अर्चना राशि के अनुसार करनी चाहिए। बताया कि पुरुषों को ओम नम:शिवाय व स्त्रियों को शिवाय नम: मंत्र से जलार्पण करना चाहिए।

विभिन्न राशि के जातक कैसे करें शिव पूजन
राशि व पूजन विधि
मेष राशि-जल में रोली मिलाकर सफेद तिलों से पूजन
वृष राशि-जल में सफेद चंदन मिलाकर दूध से पूजन
मिथुन -जल में काले तिल व शहद मिलाकर पूजन
कर्क-जल में दूध, सफेद फूल व सफेद तिल मिलाकर पूजन
सिंह राशि - जल में लाल चंदन व घी मिलाकर पूजन
कन्या - सफेद तिल व चंदन मिलाकर पूजन
तुला - सफेल तिल, फूल व घी से पूजन
वृष्चिक- राशि गुड़, काले तिल व दूध से पूजन
धनु राशि- सफेद तिल व दूध मिलाकर पूजन
मकर राशि - काले तिल व दूध व चने मिलाकर पूजन
कुंभ राशि- काले तिल दूध व घी मिलाकर पूजन
मीन राशि- हल्दी, सफेद चंदन व शक्कर, दूध व घी मिलाकर रुद्राभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

श्रावण मास का महात्मय
शिव पुराण के अनुसार इस मास में चंद्रमा की राशि में सूर्य होने की वजह से काम्य कर्मों यथा विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत को छोड़कर साधना व भक्ति के कर्म करने से प्राणियों को अक्षय मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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शिवालयों में आज से जुटेंगे श्रद्धालु
सौर मास के अनुसार श्रावण मास का प्रारंभ सोमवार से हो रहा है। सौर मास को उत्तराखंड व नेपाल के श्रद्धालु मानते हैं, जबकि देश के अन्य भूभाग के लोग चांद्रमास को मानते हैं। लिहाजा इस मौके पर सोमवार से नगर क्षेत्र के विभिन्न प्राचीन शिवालयों में स्थानीय श्रद्धालु शिव आराधना व शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए जुटेंगे। श्रावण मास में प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर के अलावा तीर्थनगरी स्थित पौराणिक वीरभद्र महादेव मंदिर, श्रीचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, प्राचीन श्रीसोमेश्वर महादेव मंदिर, मुनिकीरेती स्थित अभिनव चंद्रेश्वर महादेव मंदिर, स्वर्गाश्रम स्थित प्राचीन श्रीरामेश्वर महादेव मंदिर आदि शिवालयों में शिवभक्त शिव दर्शन व जलार्पण के लिए जुटेंगे।
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