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सिर पर बाढ़ का खतरा, प्रशासन है खामोश

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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देहरादून में हुई बारिश ने एक झटके में ही सात लोगों की जान ले ली। इसके बावजूद ऋषिकेश प्रशासन गंगा की सहायक नदियों और सड़कों पर पसरे अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। पहाड़ों में बारिश से किसी भी समय गंगा और चंद्रभागा नदी की बाढ़ में भारी जानमाल के नुकसान की आशंका बनी हुई है। अल्टीमेटम देने के बावजूद प्रशासन बस्ती को खाली करने को तैयार नहीं है। इस मामले में अब दलील उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम की दी जा रही है।
एसडीएम हर गिरि ने बीते दिनों मानसून की दस्तक के साथ ही विभिन्न विभागीय अधिकारियों को तलब कर उनकी बैठक ली थी, जिसमें चंद्रभागा नदी किनारे बसी अवैध बस्ती को हटाने के लिए सिंचाई विभाग को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए थे। विभाग ने निर्देश के अनुपालन में तीन दिन के अल्टीमेटम के साथ अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए।
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समय सीमा पूरी हुई तो एसडीएम ने अवैध बसावट को हटाने के लिए अतिक्रमणकारियों को तीन दिन की और मोहलत दे दी। अब इसकी समय सीमा दो दिन पूर्व खत्म हो चुकी है, मगर अतिक्रमण नदी में जस के तस है। जबकि पहाड़ों में बारिश से लगातार चंद्रभागा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, जोकि बस्ती को छूकर बह रहा है। गंगा के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। ऐसे में अचानक से चंद्रभागा और गंगा में पानी बढ़ने या फिर बाढ़ आने की स्थिति में बस्ती में जानमाल की आशंका है।

एनएच और बैराज रोड पर भी अतिक्रमण
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बदरीनाथ नेशनल हाईवे व बैराज रोड से अतिक्रमण हटाने के नाम भी प्रशासन का दम फूल गया है। इस मामले में प्रशासन ने उल्टा पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय राजमार्ग की डोईवाला डिवीजन से ही खुद की भूमि की जांच अभिलेखों में सही करने के लिए कह दिया है।
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कोट्स
देहरादून में उप राष्ट्रपति के कार्यक्रम के समापन के बाद विभागीय अधिकारियों को बुलाकर कार्रवाई के लिए रणनीति तय की जाएगी। इसके बाद सड़क और नदी के किनारों से सख्ती के साथ अतिक्रमण को हटाया जाएगा।
- हर गिरि, एसडीएम, ऋषिकेश।
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