ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर/कालसी।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में शुक्रवार को सभी पटवारियों और राजस्व उपनिरीक्षकों ने तहसील में पुलिस संबंधी दस्तावेजों के बस्ते जमा करा दिए। इससे क्षेत्र की पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से रामभरोसे हो गई है। वहीं वर्षाकाल में पटवारियों/राजस्व उपनिरीक्षकों के पुलिस कार्य छोड़ने का सीधा असर आपदा से संबंधित राहत कार्यों पर भी पड़ेगा।
बता दें, वर्तमान समय तक पटवारियों और राजस्व उपनिरीक्षकों के कंधे पर ही क्षेत्र की पुलिस व्यवस्था है। क्षेत्र में किसी दुर्घटना या आपदा की स्थिति में पटवारी और राजस्व उपनिरीक्षक ही व्यवस्थाएं संभालते थे, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में शुक्रवार को सभी पटवारियों और राजस्व उपनिरीक्षकों ने तहसील पहुंचकर पुलिस संबंधी कार्य के दस्तावेजों के बस्ते जमा कर दिए। इससे क्षेत्र की पुलिस व्यवस्था रामभरोसे हो गई है। वहीं हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में प्रदेश सरकार अब तक पुलिस थाने नहीं खोल सकी है। बहरहाल पटवारियों और राजस्व उपनिरीक्षकों के पुलिस व्यवस्था का परित्याग करने से इसका असर सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा। जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र की सीमा हिमाचल प्रदेश के साथ ही पड़ोसी जिले उत्तरकाशी और टिहरी से लगी हुई है। यहां मादक पदार्थों से लेकर वन्य जीवों और वन संपदा की तस्करी होती है। आए दिन इससे जुड़े मामले प्रकाश में आते हैं। वहीं अब राजस्व उपनिरीक्षकों के पुलिस कार्य के त्याग करने से इन सब वारदातों के बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। पर्वतीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक एवं राजस्व सेवक संघ के जिलाध्यक्ष तिलक राम जोशी का कहना है कि हाईकोर्ट ने 12 जनवरी को आदेश पारित कर छह माह के भीतर पहाड़ी अंचलों की कानून व्यवस्था को सिविल पुलिस को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए थे। इन छह माह में संघ ने कई बार प्रदेश सरकार को क्षेत्र में पुलिस थाने खोलने के लिए तीन बार लिखित रिमांइडर भेजा, लेकिन प्रदेश सरकार ने उनकी बात अनसुनी कर दी। वहीं संघ ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में छह माह बाद पुलिस कार्य छोड़ दिए हैं। तिलक राम जोशी का कहना है कि राजस्व पुलिस संसाधन विहीन है ऐसे में गंभीर अपराधों की विवेचना, खुलासों और फिर उसे कोर्ट में साबित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। बहरहाल उम्मीद है कि जल्द ही क्षेत्र में पुलिस थाने और चौकियां खोल सिविल पुलिस की तैनाती कर दी जाएगी।
बिना सीमा निर्धारण कैसे रुकेंगे अपराध
कालसी तहसील में 169, चकराता में 140 और त्यूनी में 53 राजस्व गांव हैं। इन 362 कुल राजस्व गांवों में से 148 राजस्व गांव को छोड़ दिया जाए तो शेष सभी जगह राजस्व पुलिस व्यवस्था ही लागू है। वर्तमान में कालसी थाना क्षेत्र अंतर्गत 85, त्यूनी में 29 और चकराता थाना क्षेत्र अंतर्गत 34 राजस्व ग्राम आते हैं। वर्तमान में एसडीएम ने इन्हीं थाना पुलिसकर्मियों को पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था को संभालने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में बिना सीमा निर्धारण के लिए थाना पुलिस के लिए भी आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाना टेड़ी खीर साबित होगा।
कोर्ट के आदेश का हो जल्द अनुपालन
एडवोकेट क्षमा शर्मा, जिला पंचायत सदस्य गीता चौहान का कहना है कि वर्तमान परिदृश्य में किसी भी पहाड़ी क्षेत्र के लिए राजस्व पुलिस व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। संसाधन विहीन राजस्व पुलिस के लिए गंभीर अपराधों का खुलासा कठिन रहा है। ऐसे में जल्द से जल्द क्षेत्र में पुलिस चौकी और थाने खोल शीघ्र सिविल पुलिस की तैनाती की जानी चाहिए।
---
सभी थानाध्यक्षों को व्यवस्था संभालने के निर्देश दिए हैं। राजस्वकर्मियों ने महज पुलिस व्यवस्था का परित्याग किया है। जल्द ही क्षेत्र में सिविल पुलिस की तैनाती के प्रयास किए जाएंगे।
-वीके तिवारी, एसडीएम