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एक गोली से ही ढेर हो गया गुलदार

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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रायवाला क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने गुलदार को बुधवार को राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम ने मार गिराया। गुलदार पार्क के शूटर डॉ. प्रशांत की एक ही गोली से ढेर हो गया। टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर ने गुलदार के आदमखोर होने का दावा किया है।
बता दें रायवाला क्षेत्र में काफी दिनों गुलदार की दहशत थी। गुलदार ने बीते सोमवार को भी वैदिकनगर निवासी सूरत सिंह नेगी (50) को निवाला बना लिया था। सूरत सिंह नेगी का शव मंगलवार को जंगल में मिला था। टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर के मुताबिक यही गुलदार बीते चार साल में 21 लोगों की जान ले चुका था। गुलदार को घेरने के लिए काफी दिनों से प्रयास चल रहे थे। इसी बीच गुलदार ने सोमवार को सूरत सिंह को निवाला बना लिया। इसके बाद टीमों की सक्रियता बढ़ाई गई और बुधवार तड़के खांड गांव नंबर-तीन में नरभक्षी मादा गुलदार की लोकेशन मिलने पर पार्क के शूटर डॉ. प्रशांत टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद घेराबंदी करके गन प्वाइंट पर आने के बाद डॉ. प्रशांत ने गुलदार पर गोली चलाई। पहली गोली लगते ही गुलदार ढेर हो गया। मारा गया गुलदार मादा है और उसकी उम्र करीब सात साल है। गुलदार के दाहिने पैर का पंजा नहीं है। ऐसे में गुलदार आसान शिकार के लिए लोगों को निशाना बना रहा था। इसी मादा गुलदार की लोकेशन विभिन्न घटनास्थलों के आसपास मिली थी। इसके अलावा रेंज के जंगल में आबादी और हाईवे किनारे लगाए कैमरा ट्रैप से भी पुष्टि हुई। निदेशक सनातन ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद गुलदार का शव जंगल में दफना दिया गया है।
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इन टीमों ने किया काम
गुलदार को मारने वालों में रिजर्व पार्क की शूटरों की टीम में डॉ. प्रशांत के साथ जहीर बख्शी, सामर्थ सिंह, मंसूर आदि शामिल रहे। वहीं पोस्टमार्टम टीम में पार्क की पशु चिकित्सक डॉ. अदिती शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी ऋषिकेश डॉ. राजेश रतूड़ी और डोईवाला से डॉ. बीके तोमर शामिल रहे।
दूसरे नंबर पर थी मादा गुलदार
राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में कुल 13 गुलदार हैं। इनमें से पांच को रिजर्व पार्क प्रशासन पहले ही ट्रैंकुलाइज कर चुका है। इसके अलावा आदमखोर होने की आशंका में दो गुलदारों को चिह्नित किया गया था। इसमें मारे गए मादा गुलदार का नंबर दूसरा था। ऐसे में अभी तय करना मुश्किल है कि क्या मारा गया गुलदार ही चिह्नित आदमखोर था।
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निदेशक के दावे पर सवाल
नरभक्षी गुलदार को मारने का दावा करने वाले निदेशक सनातन सोनकर की बातों पर यकीन करें तो अब लोगों के ऊपर गुलदार का हमला नहीं होगा, लेकिन दूसरी ओर वह यह भी कह रहे हैं मादा गुलदार चिह्नित गुलदारों में दूसरे पर नंबर पर था। ऐसे में साफ है कि पहले नंबर पर चिह्नित गुलदार अभी भी मोतीचूर रेंज के जंगल में है। लिहाजा, दोबारा क्षेत्र में गुलदार के हमले की घटना नहीं होने का दावा फिलहाल महज हवाई साबित होता दिख रहा है।
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