गोपेश्वर। चमोली जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग के पांच डॉक्टर वेतन तो चमोली जिले से ले रहे हैं, लेकिन सेवाएं देहरादून और हरिद्वार के अस्पतालों में दे रहे हैं। पांच चिकित्सकों को बीते जून माह में बिना प्रतिस्थानी के ही देहरादून और टिहरी भेज दिया गया है। जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सकों के 63 पद सृजित हैं, इनमें 32 पद रिक्त चल रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बुरा हाल जोशीमठ, पोखरी, घाट, देवाल, थराली, नारायणबगड़ और गैरसैंण क्षेत्र में है।
वर्ष 2014 के अगस्त माह से राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में सेवाएं दे रही डा. शोभा रानी मिश्रा को निदेशालय के आदेश पर आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून में संबद्ध कर दिया गया है, जबकि आयुर्वेदिक अस्पताल चमोली में कार्यरत डा. सिद्धि मिश्रा को भी ऋषिकुल हरिद्वार में संबद्ध किया गया है। पोखरी ब्लॉक के आयुर्वेदिक अस्पताल चांदनीखाल में तैनात डा. ज्योति राणा भी वेतन तो चमोली जिले से ले रही हैं, लेकिन सेवाएं ऋषिकुल हरिद्वार में दे रही हैं। राजकीय एलोपेथिक चिकित्सालय तलवाड़ी में तैनात डा. आभा सिंह को भी वर्ष 2017 में ही आयुर्वेदिक विवि देहरादून में संबद्ध किया गया है। 20 जून को राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय डुमक में सेवाएं दे रहे डा. पांडे को देहरादून, स्वास्थ्य केंद्र टंगणी के डा. देवेंद्र पंखोली को टिहरी, स्वास्थ्य केंद्र वाण में तैनात डा. लक्ष्मण राणा और खाल-सरमोला के चिकित्सक डा. सुशील चौधरी को देहरादून तथा आयुर्वेदिक अस्पताल नंदप्रयाग में तैनात डा. मीनाक्षी खंडूरी को टिहरी स्थानांतरित कर दिया गया है। इन सभी डाक्टरों का कोई प्रतिस्थानी जिले में नहीं भेजा गया है।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. आरएस पाल का कहना है कि आयुर्वेदिक निदेशालय के निर्देश पर जिले से पांच डॉक्टर को रिलीव किया गया था। हरिद्वार और देहरादून के अस्पतालों में उन्हें संबद्ध किया गया है, जबकि उनका वेतन चमोली जिले से आहरित हो रहा है। इस संबंध में कई बार निदेशालय से पत्राचार भी किया गया, लेकिन चिकित्सक नहीं मिले हैं।