- बसों की सीमित संख्या होने के कारण छोटे वाहनों में ओवरलोड सफर मजबूरी
ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
इसे सिस्टम की हीलाहवाली कहे या फिर विभागीय उदासीनता की पहाड़ी अंचलों में आए दिन होने वाले सड़क हादसों के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूट पा रही है। जौनसार बावर क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में बसों का संचालन न होने से छोटे वाहनों में जान जोखिम में डाल ओवरलोड सफर करना लोगों की मजबूरी बन गया है। एक साल पूर्व हुए गुम्मा बस हादसे के बाद भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा है। इस हादसे के बाद से क्षेत्र की सड़कों पर जहां बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए थी वहीं प्राइवेट बसों का संचालन पूूरी तरह से बंद कर दिया गया। परिवहन निगम की भी महज नौ बसें ही संचालित हो रही है। छोटे वाहनों की संख्या भी बेहद सीमित है। ऐसे में जान जोखिम में डाल ओवरलोड सफर करना लोगों की मजबूरी बन गया है।
मालूम हो कि एक साल पूर्व हरिपुर-कोटी-मीनस मोटर मार्ग पर गुम्मा (हिमाचल प्रदेश) के पास प्राइवेट बस के खाई में गिरने 45 लोगों की मौत हो गई थी। तब विभाग ने दो राज्यों के बीच प्राइवेट बसों के संचालन की अनुमति न होने के कारण सभी प्राइवेट बसों का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। जिसके बाद से इस रूट पर परिवहन विभाग की महज दो बसे ही संचालित हो रही है जबकि, पूर्व तक इस रूट पर कुल 14 प्राइवेट बसें संचालित होती थी। अन्य रूटों पर भी सात बसें ही चल रही हैं। बस हादसे के बाद क्षेत्र के साहिया और कालसी में मिनी बस डिपो खोलने की मांग उठी थी, लेकिन यह मांग भी हादसे के पुराना होने के साथ ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
वर्तमान में इन रूटों पर चल रहीं निगम की बसें
वर्तमान में क्षेत्र के हनोल-मसूरी-त्यूनी, चकराता-त्यूनी, देहरादून-केेराड़, देहरादून-साहिया, देहरादून-चकराता-लाखामंडल, हरिद्वार-रोहड़ू वाया मीनस, देहरादून-जखोल रूट पर परिवहन निगम की नौ बसें संचालित की जा रही हैं।
परिवहन निगम के बेड़े में नई बसों के शामिल होते ही क्षेत्र की सड़कों पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
- पूजा पैरो, सहायक महाप्रबंधक
अभियान जारी
ओवरलोडिंग के खिलाफ परिवहन विभाग का अभियान बुधवार को भी जारी रहा। परिवहन कर अधिकारी रत्नाकर सिंह ने कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान चलाते हुए 10 वाहनों के चालान काटे।