गोपेश्वर। बारिश से अमृत गंगा पेयजल योजना के स्रोत पर 24 लाख की लागत से निर्मित फिल्टर टैंक मलबे में दब गए हैं, जिससे कई मोहल्लों में पानी की आपूर्ति तीन दिन से ठप है। लोगों ने डीएम से अमृत गंगा पेयजल योजना की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
जल निगम की ओर से वर्ष 2015 में अमृत गंगा पेयजल योजना का निर्माण किया गया। नगर को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए योजना के शुरुआत में फिल्टर टैंक का निर्माण भी किया जाना था। जल निगम की ओर से 24 लाख की लागत से गत फरवरी में योजना के मूलस्रोत पर रफरिंग फिल्टर (पानी से कूड़ा हटाने वाला टैंक) का निर्माण किया। बीते एक जुलाई को हुई बारिश से फिल्टर टैंक मलबा भरने से पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। इधर, जल निगम के ईई वीके जैन का कहना है कि मुख्य स्रोत पर फिल्टर की व्यवस्था के लिए रफरिंग फिल्टर टैंक का निर्माण किया गया था, लेकिन इसमें मलबा भर गया है। इसे साफ करवाया जा रहा है। योजना के स्रोत पर दो करोड़ की लागत से दूसरा फिल्टर टैंक भी बनना है। इसके लिए शासन को वित्तीय प्रस्ताव भेजा गया है।