जोशीमठ। मौसम की बेरुखी सेब काश्तकारों पर भारी पड़ रही है। लगातार तीसरे साल भी समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से सेब का उत्पादन कम हुआ है, जिससे काश्तकारों में मायूसी है। वर्ष 2015 में सेब की 50 क्विंटल पैदावार होती थी लेकिन अब 20 क्विंटल की सेब का उत्पादन हो रहा हे।
जोशीमठ ब्लाक के नीति, उर्गम, किमाणा, बड़ागांव, औली, सुनील और सलूड़ गांव में प्रमुख रूप से डेलीसैस, ग्रीन स्वीट, एलीसनवरी और मखनटोस सेब की प्रजातियों का उत्पादन होता है। जोशीमठ के रसीले सेब की देश की विभिन्न मंडियों में सप्लाई होती है लेकिन तीन सालों से बारिश और बर्फबारी कम होने के कारण सेब का उत्पादन कम हो रहा है। सेब काश्तकार राजेश रावत, मकर सिंह कुंवर, गोविंद सिंह और प्रताप भंडारी का कहना है कि उनकी आजीविका का साधन सेब की फसल है। वर्ष 2015 में 50 क्विंटल सेब की पैदावार होती थी और अब 20 क्विंटल सेब भी हाथ नहीं लग रहे हैं। इस बार फ्लावरिंग के दौरान ओलावृष्टि होने से सेब की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। उद्यान निरीक्षक सोमेश भंडारी का कहना है कि जोशीमठ क्षेत्र में तीन हजार मैट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है, इस बार ओलावृष्टि और समय पर बर्फबारी न होने से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। पूर्व में जोशीमठ के सेब मथुरा, हल्द्वानी, दिल्ली और सहारनपुर की मंडियों के लिए सप्लाई होते थे, लेकिन अब सेब स्थानीय बाजार तक ही सिमटता जा रहा है।