श्रीनगर। विधानसभा क्षेत्र देवप्रयाग की 11 पंपिंग पेयजल योजनाओं को बजट का इंतजार है। वहीं योजना के संचालन व मरम्मत का बजट न मिलने से पंप संचालक एजेंसियों व कर्मियों को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। संचालन कार्यों में लगे कर्मियों ने समय पर मानदेय भुगतान व बोनस दिए जाने की मांग की है।
विकासखंड कीर्तिनगर व देवप्रयाग के सैकड़ों गांवों के लिए बनी 11 पंपिंग पेयजल योजनाओं के संचालन की व्यवस्था जल संस्थान के पास है, जिसके संचालन के लिए जिला योजना में हर साल बजट का प्रावधान किया जाता है। बताते है कि इन पंपों के संचालन व मरम्मत पर प्रतिवर्ष करीब 5 करोड़ से भी अधिक की लागत आ जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 5 करोड़ 37 लाख का परिव्यय हुआ था, लेकिन उसमें भी विभाग को करीब 4 लाख का भुगतान किया गया है। जबकि इस वित्तीय वर्ष के तीन माह बीत जाने के बाद भी विभाग को पंपों के संचालन के लिए जिला योजना से अभी तक बजट नहीं मिल पाया है। दूसरी ओर पंप संचालन कार्यों में लगे कर्मियों ने बताया कि समय पर बजट जारी न होने से उन्हें भी समस्या से जूझना पड़ रहा है। अधिशासी अभियंता गढ़वाल जल संस्थान देवप्रयाग आशीष भट्ट ने कहा कि पंपों के संचालन व मरम्मत कार्यों का गत वर्ष का करीब एक करोड़ बकाया है। जबकि इस वित्तीय वर्ष का बजट भी नहीं मिल पाया है।