श्रीनगर। गढ़वाल विवि में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अब पानी के लिए प्लास्टिक की बोतलों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। प्लास्टिक की बोतलों पर बैन लगाने के लिए यूनिवर्सिटी मिशन ऑन नमामि गंगे (उमंग) द्वारा नमामि गंगे बोतल तैयार की गई है, जोकि मेटल की। इस पर गंगा स्वच्छता संबंधित टैग लाइन भी अंकित की गई है।
गढ़वाल विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों में अब नमामि गंगे बोतल का ही प्रयोग किया जाएगा। यूजीसी ने विश्व विद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के दौरान पानी के लिए प्लास्टिक की बोतल का प्रयोग न किए जाने का सुझाव दिया था। सुझाव के पालन के लिए यूनिवर्सिटी मिशन ऑन नमामि गंगे (उमंग) ने मेटल की एक बोतल तैयार की है, जिसका नाम भी नमामि गंगे बोतल रखा गया है। उमंग के डा. सर्वेश उनियाल ने बताया कि बोतल पर ‘गंगा स्वच्छता के लिए लेकर जाएं देवभूमि से गंगाजल का उपहार’ ‘देकर जाएं गंगा स्वच्छता का संकल्प इस बार’ टैग लाइन अंकित की गई है। उनियाल ने बताया कि बोतल उत्तराखंड के उत्पादों को प्रोत्साहित करने वाली स्टार्टअप कंपनी समोड़ ने बनाई है। उन्होंने बताया कि उमंग का प्रयास है कि हरिद्वार व ऋषिकेश से प्लास्टिक की बोतलों में गंगाजल ले जाने वाले श्रद्धालु भी इन्हीं बोतलों का प्रयोग करें। प्लास्टिक की बोतल की जगह अब नमामि गंगे की बोतल को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।