जोशीमठ। चीन सीमा क्षेत्र स्थित नीती गांव तक जाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों को प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ रही है, जबकि अभी तक गांव तक जाने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती थी।
भारत-तिब्बत (चीन) सीमा पर स्थित नीती गांव भारत का अंतिम गांव है। यहां पर ग्रीष्मकाल में छह माह तक भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं, जबकि शीतकाल में ग्रामीण बर्फबारी होने के कारण जिले के निचले क्षेत्रों में आ जाते हैं। इस वर्ष भारतीय सेना की ओर से स्थानीय ग्रामीणों को मलारी गांव से आगे नीती गांव तक बिना प्रशासन की अनुमति के नहीं जाने दिया जा रहा है। स्थानीय निवासी महादीप पंवार और अनिल कुंवर ने बताया कि वे नीती गांव में टिमरसैंण महादेव मंदिर में दर्शनों के लिए जा रहे थे, लेकिन सेना की ओर से उन्हें मलारी चैक पोस्ट से ही लौटा दिया गया। सेना ने नीती गांव जाने के लिए प्रशासन की ओर से अनुमति लाने के लिए कहा। इधर, जोशीमठ के एसडीएम योगेंद्र सिंह का कहना है कि ग्रामीणों की शिकायत पर सेना के अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। वहीं एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि सीमा क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।