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वीरान सिंदूड़ी गांव को आबाद करने की पहल

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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असुविधाओं के कारण वीरान हो रहे गांवों की सुध लेने को सरकार तैयार नहीं है, लेकिन पलायन करने वाले जागरूक लोगों ने रिवर्स पलायन की पहल जरूर शुरू कर दी है। हाल ही में मानव विहीन हुए पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के सिंदूड़ी गांव के ग्रामीणों को गांव छोड़ने का दर्द सताने लगा है। गांव व खंडहर होते घरों की मूल वजहों की तलाश को लेकर पलायन कर चुके लोग रविवार को सिंदूड़ी में जुटकर चिंतन करने जा रहे हैं।
सिंदूड़ी विकास समिति से जुड़े सीपी भट्ट ने बताया कि उनका गांव लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे के फल्दाकोट से महज चार किलोमीटर जबकि घट्टूगाड़-सिलोगी मार्ग के मोहनचट्टी से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर है। बावजूद इसके गांव में पेयजल, विद्युतीकरण, सड़क आदि कोई मूलभूत सुविधाएं राज्य बनने के बाद भी नहीं जुट पाई हैं। गांव में जंगली जानवरों के आतंक से जानमाल का खतरा बना रहता है, मगर गांवों में संसाधनों की बहाली के लिए अब तक बनी सरकारों ने कभी इस ओर गौर ही नहीं किया। लिहाजा राज्य बनने के समय आबाद गांव से परिवार पलायन करते चले गए और वर्तमान में सिंदूड़ी गांव पूरी तरह से वीरान हो गया।
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उनका कहना है कि गांववासी अपनी धरोहर के संरक्षण के लिए वापस गांव लौटना चाहते हैं। चिंतन बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए जाएंगे, जिनके जरिए सरकार से गांव में मूलभूत संसाधनों की बहाली की मांग की जाएगी। बताया कि सरकार जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने को गंभीरता दिखाए तो कोई भी परिवार अपनी पैतृक भूमि को नहीं छोड़ना चाहेगा।
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