संदीप थपलियाल
श्रीनगर। ठीक आज के ही दिन पांच साल पूर्व 17 जून 2013 को घाटी फल शोध एवं प्रदर्शन केंद्र केदारनाथ जलप्रलय में तबाह हो गया था। जहां आपदा के बाद उत्तराखंड मेें पुनर्स्थापना के नाम पर अरबों रुपये खर्च हुए हैं। वहीं, इस प्रदर्शन केंद्र की मरम्मत के लिए सरकार के हाथ तंग रहे। मूल रुप से श्रीनगर के समीप औणी गांव निवासी सुबोध उनियाल के उद्यान मंत्री बनने के बाद उम्मीद बंधी थी, कि इस केंद्र के लिए बजट मिलेगा, लेकिन इस केंद्र के हालात सुधारने के लिए एक धेला नहीं मिला।
2 जून 1975 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के हाथों श्रीनगर में अलकनंदा नदी किनारे घाटी फल शोध एवं प्रदर्शन केंद्र का उद्घाटन हुआ था। लगभग 4.6 हेक्टेअर में फैले केंद्र का मकसद शोध, पहाड़ में होने वाली सब्जियों एवं फलों की पौध तैयार करना, स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण और आय के साधन विकसित करना था। बाद में इसका नाम बदलकर औद्यानिक प्रशिक्षण एवं परीक्षण केंद्र कर दिया गया। इस केंद्र से उद्यान विभाग की ठीक-ठाक आय हो जाती थी, लेकिन 16/17 जून को आई बाढ़ ने पूरी तस्वीर बदलकर रख दी। अलकनंदा नदी के पानी के साथ आए मलबे ने केंद्र की छह फीट ऊंची सुरक्षा दीवार को तोड़ दिया था। बाढ़ के मलबे में आडू, बेल और करोंदे के पेड़ दब गए और बचे पेड़-पौधे भी सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। नर्सरी अतिक्रमण की चपेट में है। आवारा पशु पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सिर्फ एक हिस्से में पौध तैयार हो रहे हैं। इन पौधों, आम व लीची के पेड़ों से केंद्र की थोड़ा बहुत आमदनी हो रही है। आप नेता नवीन नौटियाल का कहना है कि आपदा के बाद पूरे राज्य में अरबों के काम कराए गए। श्रीनगर में आपदा के बाद इसी केंद्र के समीप संचालित हो रहे महिला थाना व सीओ ऑफिस का दूसरी जगह निर्माण कराया गया, लेकिन प्रशिक्षण केंद्र के लिए एक रुपया नहीं दिया गया।
---औद्यानिकी प्रशिक्षण एवं परीक्षण केंद्र की मरम्मत के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा गया है। पिछली बार लगभग 98 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया। हर साल लागत बढ़ने से दोबारा स्टीमेट भेजा जाता है। डा. सतीश मिश्रा, सहायक निदेशक उद्यान विभाग