श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर से पासआउट एक एमबीबीएस डॉक्टर ने सरकारी सेवा अनिवार्यता अनुबंध (बांड) तोड़ने पर कालेज के खाते में 30 लाख रुपये जमा करा दिए हैं। डॉक्टर ने सरकारी क्षेत्र में काम नहीं करने की इच्छा जताई है।
उत्तराखंड के सरकारी चिकित्सा संस्थानों से रियायती दर (सब्सिडी) पर मेडिकल की पढ़ाई करने के एवज में छात्र-छात्राओं को बांड (अनुबंध) भरना पड़ता है। अनुबंध के अनुसार, उन्हें पांच साल तक संविदा पर प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में सेवा देनी होती है, जबकि बांड तोड़ने पर उन्हें साढ़े चार साल की फीस ब्याज सहित भरनी पड़ती है। मौजूदा समय में कई ऐसे डॉक्टर हैं, जिन्होंने पास आउट होने के बाद बांड के अनुसार सरकारी सेवा ज्वाइन नहीं की है। स्वास्थ्य विभाग इनकी ढूंढ खोज भी कर रहा है। ऐसे ही एक बांडधारी डॉक्टर ने बांड तोड़ने का पत्र मेडिकल कॉलेज को भेजते हुए निर्धारित रकम भी जमा करा दी है। संस्थान के प्रभारी प्राचार्य प्रो. केके अग्रवाल ने बताया कि ऊधमसिंह नगर निवासी डा. इंद्रेश विक्रम सिंह 2010 बैच के एमबीबीएस छात्र हैं। वे 2015 में पासआउट हुए थे। इंटर्नशिप करने के बाद उनको देहरादून जिला आवंटित हुआ था। उक्त चिकित्सक ने सरकारी क्षेत्र में काम न करने की इच्छा जाहिर करते हुए 30 लाख रुपये जमा कराए हैं।