ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
राज्य सरकार एम्स की उत्तराखंड शाखा को किसी भी तरह से सहयोग करने को तैयार नहीं है। ऐसे में एम्स प्रशासन के कई प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की ओर से वर्ष 2014-15 से राज्य सरकार से संस्थान के विस्तारीकरण के लिए दो सौ एकड़ भूमि की मांग की जा रही है, जिस पर आमजन के लिए आधुनिक चिकित्सा सेवा के कई केंद्र स्थापित किए जाने हैं, लेकिन सरकार मांग को लगातार अनसूना कर रही है।
एम्स में चिकित्सा और इमरजेंसी सेवा शुरू होने के बाद अब दुर्घटनाओं व अन्य मामलों के मरीज भी संस्थान में पहुंचने लगे हैं। लिहाजा, इनमें से गंभीर रोगियों की मृत्यु के बाद मृतकों के शवों को संबंधित थाना क्षेत्रों के लिए अधिकृत पोस्टमार्टम (पीएम) हाउस भेजा जा रहा है। जबकि एम्स संस्थान में पोस्टमार्टम कराने की पूरी सुविधा उपलब्ध है। बावजूद इसके सूबे के गृह मंत्रालय ने चार माह से एम्स में पोस्टमार्टम सेवा शुरू कराने संबंधी अनुमति की फाइल को अटका रखा है। जबकि स्थानीय पुलिस, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी के स्तर से पहले ही एम्स में पीएम हाउस संबंधी फाइल को अनुमति दिए जाने की संस्तुति कर मंत्रालय को भेजा जा चुका है।
एम्स की ओर से शव के पोस्टमार्टम के साथ ही बिसरा और फोरेंसिक जांच की सुविधा भी पुलिस विभाग को मुहैया कराने के लिए तैयार है, फिर भी मंत्रालय एम्स की फाइल को मुहर लगाने को तैयार नहीं दिख रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए पुलिस महकमे को किसी प्रकार का शुल्क भी अदा नहीं करना होगा।
कोट्स
सरकार से संस्थान के विस्तारीकरण के लिए भूमि उपलब्ध कराने के लिए लगातार बातचीत और पत्राचार किया जा रहा है, मगर अभी तक मामले में कोई सकारात्मक कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। पोस्टमार्टम सेवा शुरू करने के लिए चार माह से अनुमति भी नहीं मिल पाई है।
- हरीश थपलियाल, जनसंपर्क अधिकारी, एम्स
सरकार के स्तर पर इस प्रकार का कोई भी मसला विचाराधीन है, तो इसे दिखवाया जाएगा। जानकारी जुटाकर एम्स की मांगों को जल्द पूरा किया जाएगा।
- मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री व प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकारजारी