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आंचलिक फिल्मों के विकास को सरकार लापरवाह
-- लोकभाषा से जुड़ी फिल्मों को बढ़ावा देने की दिशा में नहीं हुए प्रयास
-- मेजर निराला फिल्म के नायक राजेश मालगुड़ी ने लगाए सरकार पर आरोप
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश ।
उत्तराखंडी फिल्म मेजर निराला के नायक व जाने-माने फिल्म अभिनेता राजेश मालगुड़ी ने आंचलिक फिल्म इंडस्ट्री को लेकर राज्य सरकार पर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार ठोस फिल्म नीति तैयार करे और फिल्म निर्माताओं- कलाकारों को प्रोत्साहित करे तो आंचलिक फिल्म इंडस्ट्री भोजपुरी व वॉलीबुड फिल्म इंडस्ट्री का मुकाबला कर सकती है। कहा कि सरकारी रवैये के कारण ही आंचलिक बोली-भाषा की फिल्मों को सफलता नहीं मिल पा रही है।
इन दिनों तीर्थनगरी के रामा पैलेस में चल रही फिल्म मेजर निराला के प्रमोशन के लिए तीर्थनगरी पहुंचे फिल्म अभिनेता राजेश मालगुड़ी ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत के दौरान बताया कि राज्य सरकार व यहां के राजनेताओं ने लोकभाषा से जुड़ी फिल्मों को कभी भी बढ़ावा देने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए। जिसके कारण करीब साढ़े तीन दशक पुरानी आंचलिक फिल्म इंडस्ट्री का विकास नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि यहां आंचलिक फिल्मों को अपेक्षाकृत कम सफलता मिलती है।
बकौल मालगुड़ी वह अब तक करीब दो दर्जन छोटी-बड़ी आंचलिक फिल्मों में काम कर चुके हैं, जिनमें भग्यान बेटी, दुख का कांडा सुख का फूल, छम्म घुंघरू, कैका बाना, ल्या ठुंगार के अलावा बड़े पर्दे की फीचर फिल्म सुबेरौ घाम, बौडिगी गंगा और मेजर निराला शामिल हैं। उन्होंने आंचलिक बोली-भाषा से जुड़ी फिल्मों के प्रति स्थानीय युवाओं के कम रुझान पर चिंता जाहिर की।
युवाओं को आकर्षित करने की नीति बनें
मालगुड़ी ने बताया कि राज्य सरकार को युवाओं को फिल्मों के प्रति आकर्षित करने वाली नीति तैयार करनी होगी। कहा कि मेजर निराला को भी अपेक्षाकृत कम दर्शक मिल रहे हैं जोकि चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोकभाषा की फिल्मों के विकास के लिए पहाड़ से जुड़े लोगों को फिल्म देखने के लिए सिनेमाघर तक आने की जरूरत है। उन्होंने गढ़वाल महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजे नेगी का आभार जताया कि वह तीर्थनगरी में आंचलिक बोली भाषा की फिल्मों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।