श्रीनगर। राजकीय इंटर कॉलेज पीपलीधार डागर के भवन नव निर्माण के लिए जब बजट नहीं मिला, तो सरकार का मुंह ताकने के बजाय शिक्षकों और कुछ ग्रामीणों ने स्वयं पहल कर भवन की मरम्मत कराई। अब जाकर कक्षा-कक्ष छात्रों के बैठने लायक बन सके है।
टिहरी जिले के विकास खंड कीर्तिनगर के अंतर्गत जीआईसी पीपलीधार का विद्यालय भवन काफी पुराना है। लगभग 4 दशक पुराने कक्षा-कक्षों जर्जर हो चुके हैं। स्थिति इस कदर है कि छत से प्लास्टर झड़ने लगा। बारिश होने पर छत टपकने लगती। विद्यालय प्रशासन की ओर से हर साल भवन पुनर्निर्माण के लिए बजट मांगा जाता है, लेकिन हर बार हाथ खाली रह जाते हैं। सरकार से कुछ मदद न मिलने और छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए स्कूल के प्रधानाचार्य अनिल कुमार पांडे ने शिक्षकों के साथ मंत्रणा कर अपनी तनख्वाह से कक्षा-कक्षों की मरम्मत करवाने का सुझाव दिया। सुझाव पर अमल करते हुए प्रवक्ता जसवंत लाल व सहायक अध्यापक किशोरी सिंह ने भी हामी भर दी। जब गांव के सामाजिक कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने भी खुले हाथ से मदद दे दी। शिक्षक व ग्रामीणों सहित 8 लोगों ने मददगार बनते हुए लगभग एक लाख रुपये जमा किए। इस रकम से छत की मरम्मत, पिलर व विम बनाए गए। भवन मरम्मत के लिए प्रधानाचार्य अनिल पांडे, शिक्षक जसवंत लाल व किशोरी सिंह के अलावा सतन सिंह नेगी, रिटायर्ड कै. चित्रमणि भट्ट , प्रभुदयाल, श्रीदेव सुमन भट्ट , सज्जन सिंह नेगी ने मदद की।
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-मैं खुद जीआईसी पीपलीधार गया था। शिक्षकों और अभिभावकों की पहल सराहनीय है। उनके योगदान से अन्य को भी प्रेरणा मिलेगी।
डा. दिनेश गौड़, मुख्य शिक्षा अधिकारी टिहरी