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आज के दौर में बाल और बाल साहित्य हाशिए पर: प्रो. पाठक

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गैरसैंण। श्रीभुवनेश्वरी महिला आश्रम (एसबीएमए) में आयोजित बाल साहित्य संगोष्ठी के दूसरे दिन साहित्यकारों ने बाल और बाल साहित्य पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। कहा गया कि आज के दौर में बाल और बाल साहित्य दोनों हाशिए पर हैं। बाल साहित्य पर विशेष ध्यान दें ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सही हो सके।
आश्रम के सभागार में आयोजित संगोष्ठी के दूसरे दिन के पहले सत्र का शुभारंभ साहित्यकार रमेेश पंत ने किया। मुख्य अतिथि पद्मश्री शेखर पाठक ने बाल साहित्य में मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को जोड़ने पर बल दिया। रमेश पंत ने कहा कि बाल साहित्य की रचना बालपन में रमकर ही की जा सकती है। आश्रम के सचिव एडवोकेट ज्ञान सिंह रावत ने कहा कि बच्चों से संबंधित साहित्य स्कूल और गांव स्तर पर उपलब्ध होने चाहिए। एसबीएमए के परियोजना प्रबंधक गिरीश डिमरी ने भी विचार रखे। बाल साहित्य रचनाकार गोविंद शर्मा ने कहा कि आज पठन पाठन की संस्कृति समाप्त होती जा रही है। कार्यक्रम का संचालन डा. दीपा कांडपाल ने किया। कार्यक्रम में राजस्थान की चेतना उपाध्याय और डा. भैंरो लाल गर्ग, लखनऊ के धन सिंह मेहता अनजान, मधुबनी विहार के डा. संजीव शर्मा, कुसुम चौधरी, भगवती प्रसाद द्विवेदी और शंभू सौरभ, देवरिया के दयाशंकर कुशवाह, हरियाणा के कमेलश चौधरी, शमशेर कौशल्या, गंगटोक की मीना शुब्बा, महाराष्ट्र के ओम प्रकाश शिव, भास्करा नंद डिमरी , नवीन डिमरी, दयाशंकर कुशवाह, अशोक गुप्त, बृज नंदन वर्मा आदि ने बाल कविताएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर कृपाल सिंह, दरबान सिंह, लायक राम, बीएस बुटोला, सतीश भगत, कमलेश चौधरी, भुवन नौटियाल, विमला जोशी, महेंद्र राणा, मंजू पांडे, महाबीर रवांटा, कालिका प्रसाद सेमवाल, विजय भट, शंभू प्रसाद भट्ट और अनिल पुनेठा सहित 11 प्रांतों के 130 साहित्यकार मौजूद थे।
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बच्चों ने दी कविताओं की प्रस्तुति
गैरसैंण। बाल काव्य गोष्ठी में बाल साहित्यकार गुंजन, हिमांशु, दिव्या, मुहम्मद समी, मोनिका, कविता, कंचन, चेतना, श्रेया, प्रवीण, आयुष तथा पूरन सिंह ने स्वरचित कविताएं सुनाईं। साथ ही स्वरचित बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा की ओर से यहां बाल पत्रिकाओं की प्रदर्शनी लगाई गई। कार्यक्रम में अल्मोड़ा के हरीश चंद्र उप्रेती की कविता संग्रह जीवन का सार का विमोचन किया गया।
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