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डग्गामारी रोकने में नाकाम संभागीय परिवहन विभाग

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ब्यूरो/अमर उजाला
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ऋषिकेश। चारधाम यात्रा का सबसे अहम हिस्सा परिवहन है, लेकिन सरकार की लापरवाही से इस अहम व्यवस्था पर ही प्रश्नचिन्ह लग गया है। यात्रा में बाहरी प्रदेशों के वाहनों की डग्गामारी रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, जिसका खामियाजा राज्य की निजी परिवहन कंपनियों के साथ ही परिवहन निगम को भी नुकसान के तौर पर उठाना पड़ रहा है।
सरकार ने देहरादून के आरटीओ सुधांशु गर्ग को यात्रा में परिवहन व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए नोडल अधिकारी नामित किया है। बावजूद इसके नोडल अधिकारी से यात्रा में लगातार हो रही डग्गामारी संभल नहीं रही है।
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यात्रा में बाहरी प्रदेशों के व्यावसायिक वाहनों से डग्गामारी हो ही रही है। इसके अलावा यात्रा में विभिन्न राज्यों के निजी वाहनों का प्रयोग भी व्यवसायिक तौर पर धड़ल्ले से किया जा रहा है। सरकार ने डग्गामारी पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश में महज दो चेक पोस्ट बनाए हैं, इनमें एक गंगोत्री राजमार्ग पर भद्रकाली व दूसरी बदरीनाथ हाईवे पर ब्रह्मपुरी में बनाई गई है। जिससे ठीक मॉनीटरिंग व सघन चेकिंग के अभाव में महकमे से डग्गामारी के मामले थामे नहीं थम पा रहे हैं। बदइंतजामी का नुकसान यात्रा के लिए बने सूबे की नौ निजी परिवहन कंपनियों के संयुक्त रोटेशन को उठाना पड़ रहा है। उत्तराखंड परिवहन निगम भी बाहरी राज्यों के वाहनों से लोकल सवारियां ढोए जाने से परेशान है।

बिना ग्रीन कार्ड और परिमट के भी हो रही यात्रा
ऋषिकेश। चारधाम यात्रा में लापरवाही के चलते डग्गामारी का आलम यह है कि बिना ग्रीन कार्ड और परमिट के तीर्थयात्रियों को धामों के दर्शन कराए जा रहे हैं। ऐसे ही एक मामला बीते मंगलवार को सामने आया है, जिसमें राजस्थान की एक मैक्स-कैब का चालक अनिवार्य ग्रीन कार्ड और परमिट के बगैर ही राजस्थान के यात्रियों को चारधाम की यात्रा कराकर लौट आया। वापसी में ब्रह्मपुरी चेकपोस्ट पर संयोग से संभागीय परिवहन विभाग के कर अधिकारी कुलवंत सिंह चौहान ने उक्त चालक को पकड़ लिया, जिसके बाद उसकी कार को सीज किया गया।

पुलिस और एसडीएम को अधिकार, फिर भी चेकिंग नहीं
ऋषिकेश। पर्वतीय जनपदों में राज्य सरकार ने वर्ष 2005 में पुलिस और एसडीएम को यात्री वाहनों की चेकिंग का अधिकार दिया था, जिसकी मूल वजह संभागीय परिवहन विभाग में मैन पावर की कमी थी, लेकिन अभी तक प्रशासन और पुलिस की ओर से इस पर अमल या कार्रवाई धरातल पर कहीं नजर नहीं आई है। लिहाजा, इस मामले में प्रशासन और पुलिस भी डग्गामारी को बढ़ावा देने में काफी हद तक जिम्मेदार हैं।

डग्गामारी में 19 वाहन हुए सीज 42 के चालान
ऋषिकेश। संभागीय परिवहन विभाग की टीम ने क्षेत्र में डग्गामारी में अब तक बाहरी राज्यों के आठ मैक्स-कैब और बस, 13 निजी कारों को व्यवसायिक इस्तेेमाल में सीज किया है। इसके अलावा 42 बाहरी प्रांतों के वाहनों के चालान किए गए हैं। परिवहन कर अधिकारी कुलवंत सिंह चौहान ने बताया कि विभाग लगातार डग्गामारी पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास कर रहा है।

परिवहन निगम को लौटानी पड़ी 16 बसें
ऋषिकेश। चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों को बसों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए परिवहन निगम ने 75 बसें आरक्षित की थी, जिसमें यात्रा के शुरू होने के एक माह बाद ऋषिकेश समेत विभिन्न डिपो की 20 बसों को लगाया गया था, लेकिन निगम की बसों को यात्री नहीं मिल पाए, जिसके चलते निगम की 16 बसें ऋषिकेश बस अड्डे पर पांच दिनों तक खड़ी रही। बसों के नहीं चलने से निगम को रोजाना चार लाख का नुकसान उठाना पड़ा। लिहाजा, निगम को यहां से रोडवेज बसों को उनके डिपो में वापस भेजना पड़ा। वापस गई बसों में हरिद्वार और श्रीनगर डिपो की तीन-तीन, चंपावत की छह, टनकपुर और लोहाघाट की दो-दो बसें शामिल थीं। बसों को लौटाने की मूल वजह डग्गामारी बताई जा रही है। इसकी पुष्टि निगम के उप महाप्रबंधक पीके भारती ने की है।

40 प्रतिशत घटा रोटेशन का काम
ऋषिकेश। चारधाम यात्रा के लिए बनी नौ निजी परिवहन कंपनियों के संयुक्त रोटेशन ायात्रा व्यवस्था समिति का कारोबार यात्रा में डग्गामारी के चलते 40 प्रतिशत तक कम हो गया है। रोटेशन के पूर्व अध्यक्ष सुधीर राय के अनुसार बाहरी वाहनों से चारधाम यात्रा में हो रही डग्गामारी के कारण निजी परिवहन व्यवसायियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व में उत्तराखंड में चारधाम यात्रा छह माह चलती थी, मगर अब यात्रा का दायरा डेढ़ से दो माह में सिमटकर रह गया है। उन्होंने बताया कि इस साल टू बाई टू की करीब 20 बसें चारधाम यात्रा में अब तक इस्तेमाल ही नहीं की जा सकी। उन्होंने आशंका जताई कि अगर सरकार व परिवहन विभाग इसी तरह से लापरवाह रहा तो अगले साल चारधाम यात्रा संचालन के लिए संयुक्त रोटेशन बनना भी मुश्किल है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
डग्गामारी रोकने के लिए ऋषिकेश क्षेत्र में दो चेकपोस्ट बनाए गए हैं। हरिद्वार में एक टीम सिर्फ डग्गामारी पर कार्रवाई के लिए लगाई गई है। विभाग इसके लिए अपना काम का रहा है, लेकिन प्रशासन और पुलिस के पास अधिकार होने के बावजूद वह सहयोग को तैयार नहीं हैं। डग्गामारी को जड़ से खत्म करने के लिए प्रभावी इंतजाम किए जा रहे हैं।
सुधांशु गर्ग, आरटीओ, देहरादून
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