गैरसैंण। श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सभागार में शुक्रवार से तीन दिवसीय बाल साहित्य संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी के पहले दिन आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने बच्चों और बालपन पर आधारित विभिन्न कविताएं प्रस्तुत कीं। संगोष्ठी में देशभर के बाल साहित्यकार और कवि शामिल हुए।
आश्रम के संस्थापक स्वामी मनमंथन के चित्र पर माल्यार्पण के बाद संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में पहले दिन कवि गोष्ठी ने खूब रंग जमाया। महाराष्ट्र के बाल साहित्यकार हरीश चंद्र बोरकर की अध्यक्षता में हुई कवि गोष्ठी में राजस्थान के कवि डा. चेतना उपाध्याय ने बच्चे हैं हम हमें बचपन की तलाश, शिक्षा ही नहीं हमें ज्ञान की हो तलाश..., उत्तराखंड कीर्तिनगर के जेके पैन्यूली ने इनमें न कोई हिंदू है न मुसलमान है..., श्रीनगर के देवेंद्र उनियाल ने बच्चे हैं हम बच्चे ही रहने दो... सहित कई कविताएं प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि दिल्ली की सुधा शर्मा ने काव्य गोष्ठी की सराहना की।
रतन सिंह किरमोलिया की अध्यक्षता में शुरू हुए कार्यक्रम के पहले सत्र में एसबीएमए के परियोजना प्रबंधक गिरीश डिमरी ने कहा कि संगोष्ठी में पहुंचे देश के विभिन्न हिस्सों के साहित्यकारों ने राज्य का मान बढ़ा है। यह कार्यक्रम में प्रथम विक्टोरिया क्रास विजेता स्व. दरवान सिंह नेगी को समर्पित है। बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला ने कहा कि भविष्य में देश के विभिन्न प्रांतों में भी ऐसे कार्यक्रम किए जाएंगे। आज के वैज्ञानिक युग में अंध विश्वासों से भरे साहित्य परोसे जा रहे हैैं, जो बच्चों के लिए सही नहंी है। ऐसे में बच्चों के लिए वैज्ञानिक सोच पर आधारित साहित्य की रचना की जा रही है।
इस अवसर पर संयोजक मंडल के सदस्य बीएस बुटोला, अमित चमोली, गोवर्द्धन यादव, शशि ओझा, नर्मदा प्रसाद, किसान दीवान, डा. शील कौशिक, संजीव शर्मा, डा. मेजर शक्ति राज आदि सहित छिन्दवाड़ा, भीलवाड़ा, गंगटोक, लखनऊ, संगरिया राजस्थान, महेंद्र गढ़ हरियाणा, दिल्ली, दरभंगा विहार, सिरसा, लालगढ़, बीकानेर मधुबनी तथा उत्तराखंड के श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, द्वाराहाट, हल्द्वानी, गैरसैंण आदि नगरों के प्रतिष्ठित साहित्यकार मौजूद थे।