ब्यूरो/अमर उजाला
साहिया। सिंचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा काश्तकारों को भरना पड़ रहा है। दैवी आपदा में क्षतिग्रस्त हुई सिंचाई गूल की अभी तक मरम्मत नहीं कराई गई है। सिंचाई के अभाव में किसान धान की रोपाई के लिए पौध तक तैयार नहीं कर सके हैं। उनका कहना है स्रोत में पर्याप्त पानी होने के बावजूद उनके खेत सूखे हैं।
वर्ष 2010 में लघु सिंचाई विभाग ने हईया तक एक किमी लंबी गूल का निर्माण कराया। इस गूल से हईया के साथ ही किमोटा और कनबुआ गांव के 50 किसानों की करीब 30 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती थी। सिंचाई के साधन होने के कारण अच्छी पैदावार होती थी। तीन साल पूर्व भारी बारिश के दौरान गूल क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिसे आज तक ठीक नहीं कराया जा सका है। स्थिति यह है कि सिंचाई के अभाव में खेत सूखे पड़े हैं।
प्रभावित किसान विरेंद्र पंवार, बाबूराम पंवार, बहादुर सिंह पंवार, मोहर सिंह, जयपाल, इंदर वर्मा का कहना है कि पहले ही सिंचाई के अभाव में टमाटर और आलू की फसल चौपट हो गई है। अब बारिश न होने के कारण धान की पौध भी तैयार नहीं हो पाई है। यदि जल्द गूल की मरम्मत नहीं हुई तो उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।