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तीन साल में ही दगा दे गई अमृत गंगा पेयजल योजना

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गोपेश्वर। वर्ष 2015 में करोड़ों की लागत से बनी अमृत गंगा पेयजल योजना तीन साल में ही दगा दे गई। एक माह से नगर में सुचारु पेयजल आपूर्ति न होने से करीब चालीस हजार की आबादी को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। गत दो दिनों से योजना पर पूर्ण रुप से पानी की सप्लाई ठप पड़ी हुई है। लोग प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी की आपूर्ति कर रहे हैं।
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गोपेश्वर नगर में सुचारु पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 2009-10 में शासन की ओर से सात करोड़ 56 लाख की लागत से अमृत गंगा पेयजल योजना को स्वीकृति मिली। योजना के तहत मंडल से गोपेश्वर तक 15 किमी सप्लाई लाइन, 7 रिजर्व टैंक, सैंड फिल्टर टैंक और नगर में सप्लाई लाइन का निर्माण किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन विभाग की ओर से वर्ष 2015 मेें योजना की सप्लाई लाइन का निर्माण किए बिना ही इसे जल संस्थान के पुराने टैंक से जोड़ दिया गया। शुरुआत में पानी की आपूर्ति सुचारु रूप से हुई, लेकिन मुख्य स्रोत पर फिल्टर की कोई व्यवस्था न होने से बरसात में कूड़ा पाइप लाइनों पर सप्लाई होने से बार-बार सप्लाई बंद होने लगी। अब नगर में पेयजल आपूर्ति लड़खड़ाने लगी है। पानी पर्याप्त न आने से लोगों प्राकृतिक स्रोतों से आपूर्ति करनी पड़ रही है। वहीं जल संस्थान के ईई पीके सैनी का कहना है कि अमृत गंगा पेयजल योजना पर जल निगम की ओर से सप्लाई लाइन का निर्माण नहीं किया गया है। पुरानी पाइप लाइनों से ही पानी की आपूर्ति हो रही है। लाइनें पुरानी होने से सप्लाई बाधित हो रही है। वहीं, जल निगम के ईई बीके जैन का कहना है कि नगर में सप्लाई लाइन के लिए शासन को 9 करोड़ 11 लाख का स्टीमेट भेजा गया है। बजट मिलते ही पेयजल रिवाइज स्टीमेट शासन को वित्तीय स्वीकृति के लियए भेजा जाएगा।
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