थराली। चुनाव मैदान में भाजपा का सहानुभूति, संगठन और सरकार का त्रिशक्ति फार्मूला जहां कांग्रेस के एका फार्मूले पर भारी पड़ा, वहीं इसी फार्मूले से भाजपा ने थराली का मैदान मार लिया। भाजपा ने जहां दिवंगत विधायक मगन लाल शाह के निधन के बाद उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष मुन्नी देवी शाह पर लोगों की सहानुभूति को भुनाया, वहीं सांगठनिक ढांचे को मजबूत और बेहतर काम करने के तरीके भी अपनाए। यही नहीं सरकार और संगठन के दम पर यहां बागियों को साधा।
थराली में उपचुनाव घोषित होते ही भाजपा ने यहां डेरा डाल दिया। तीन मई से यहां बड़े नेताओं का कार्यक्रम होने के साथ ही युवा, महिला, पूर्व सैनिक सहित कई सम्मेलन आयोजित कर संगठन को मजबूती दी गई। बदरीनाथ के विधायक को पूरी विधानसभा की जिम्मेदारी और पांच विधायकों को पांचों मंडलों में तैनात कर जिम्मेदारी तय की गई। साथ ही संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले राज्य मंत्री डा. धन सिंह को विधानसभा में जीत की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, सांसद, भगत सिंह कोश्यारी, यशपाल आर्य, श्याम जाजू, सहित सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यहां 22 मई और 26 मई को छह जनसभाएं कीं और खुद को उम्मीदवार बताया। हर सभा में मुन्नी देवी का भावनात्मक संबोधन और उस संबोधन पर महिलाओं की भावनाएं छलकना भाजपा के लिए कारगर दवा साबित हुई। हालांकि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह सहित कई बड़े नेताओं ने यहां एकजुट होकर काम किया। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी, केदारनाथ के विधायक मनोज रावत, कर्णप्रयाग के पूर्व विधायक डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी और पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण सहित कई नेेता लगातार यहां सक्रिय रहे, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिल पाई।
कोट
चमोली में लगातार भाजपा जीत रही है, जिससे साफ है कि प्रदेश की त्रिवेंद्र सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के नेतृत्व में बेहतर काम हो रहे हैं। जनोपयोगी काम होने के चलते जनता लगातार भाजपा को समर्थन दे रही है। थराली में सरकार बेहतर विकास योजनाएं धरातल पर उतारेगी। - महेंद्र भट्ट, विधायक बदरीनाथ और थराली चुनाव प्रभारी भाजपा।