श्रीनगर। काफल बेच कर साल भर की पढ़ाई का खर्चा जुटा रहे बच्चों से पालिका तहबाजारी वसूल रही है। निवर्तमान पालिका अध्यक्ष सहित स्थानीय निवासियों ने पालिका के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि सरकार जहां बच्चों को स्कूल भेजने के लिए नए-नए कार्यक्रम शुरू कर रही है, वहीं पालिका पढ़ाई के लिए अपनी फीस जुटा रहे बच्चों को हतोत्साहित कर रही है। वहीं, एसडीएम मायादत्त जोशी ने कहा कि बच्चों से तहबाजारी न वसूले जाने के लिए पालिका को निर्देशित किया जाएगा।
इन दिनों बाजार में खिर्सू क्षेत्र के कुछ ग्रामीण बच्चे काफल बेच रहे हैं। दिन भर जंगलों की खाक छानकर बच्चे टोकरियों में काफल भर कर बाजार में ला रहे हैं। ये बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में काफल बेच कर अपनी साल भर की पढ़ाई का खर्चा जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। पालिका प्रशासन इन बच्चों से भी तहबाजारी वसूल रहा है। काफल बेच रहे खिर्सू के अंकित ने कहा कि उसने 12वीं की परीक्षा दी है। अब 12वीं पास करने के बाद वह पौड़ी कालेज में पढ़ने जाएगा। वह हर साल गर्मियों की छुट्टियों में अपने दोस्त सौरभ के साथ काफल बेच कर अपनी पढ़ाई के खर्चे की व्यवस्था करता है। इस बार भी वह कालेज के खर्चे के लिए काफल बेच कर पैंसे जुटा रहा है, लेकिन पालिका उनसे 20-20 रुपये हर दिन वसूल रही है।
काफल बेच कर पढ़ाई का खर्चा जुटाने का प्रयास कर रहे बच्चों से तहबाजारी वसूलने पर स्थानीय निवासियों ने पालिका की निंदा की है। स्थानीय निवासी मदन मोहन और दीपेंद्र का कहना है कि ऐसे बच्चों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, लेकिन पालिका प्रशासन बच्चों से तहबाजारी वसूल कर उन्हें हतोत्साहित कर रही है।
कोट------------
छुट्टियों में काफल बेच कर पढ़ाई का खर्चा जुटा रहे बच्चे सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। ऐसे बच्चों से तहबाजारी नहीं वसूली जानी चाहिए। इन बच्चों को प्रोत्साहित करना हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है।
-विपिन मैठानी, निर्वतमान पालिकाध्यक्ष, श्रीनगर
-काफल बेच रहे बच्चों से तहबाजारी न वसूले जाने के लिए पालिका को निर्देशित किया जाएगा। ऐसे बच्चों से अन्य बच्चों को प्रेरणा लेनी चाहिए।
मायादत्त जोशी, एसडीएम, श्रीनगर।