ब्यूरो/अमर उजाला/कालसी।
हरिपुर में चल रहे ढोल प्रशिक्षण कार्यशाला का शनिवार को समापन हो गया। शिविर के अंतिम दिन बतौर मुख्य अतिथि जौनसार बावर अनुसूचित जाति विकास संगठन के अध्यक्ष सुशील कुमार शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पहाड़ की संस्कृति में वाद्य यंत्रों का अहम स्थान है, लेकिन अब युवा पीढ़ी का इन वाद्य यंत्रों से नाता टूटने लगा है। इस तरह की कार्यशाला के आयोजन से युवा अपनी संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। जौनसार-बावर सांस्कृतिक होलीयार रंगमंच के अध्यक्ष लायक राम ने कहा कि उनकी संस्था पहाड़ की विशिष्ट संस्कृति को बचाए रखने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में काम कर रही है। उन्होंने विवाह में लोगों के स्वागत, हारुल, झैंता, रासो और शोक में बजने वाले धुनों के बारे में जानकारी दी। शिविर में दोऊ, हाजा, गबेला, अतलेऊ, दसेऊ आदि गांवों के लोगों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर मायाराम, प्रभु भारती, दीवान सिंह, भरत सिंह, अजय आदि मौजूद रहे।