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मंजूरी के 12 साल बाद में भी नहीं बनी सड़क

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ब्यूरो/अमर उजाला
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ऋषिकेश।
यमकेश्वर प्रखंड के करीब आधा दर्जन गांव मंजूरी के 12 साल बाद भी सड़क संपर्क से नहीं जुड़ पाए हैं। लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन मार्ग की स्वीकृति के बाद भी वन विभाग से भूमि हस्तांतरित नहीं करा पाया है। मामले में वन महकमा भी लापरवाह बना हुआ है। जिसके चलते ग्रामीणों को पगडंडियां के सहारे चलने को विवश होना पड़ रहा है। गांवों तक यातायात की सुविधा नहीं होने से पलायन बढ़ रहा है।
ऋषिकेश से यमकेश्वर प्रखंड के करीब आधा दर्जन गांवों को जोड़ने के लिए फूलचट्टी से कोटा तक 9 किमी मोटर मार्ग को मंजूरी मिली थी। जिससे माला, सिरासू, पल्लाकोट, धुनारगांव, पुलाणी, पलेलगांव आदि गांवों को भी लाभ मिलना था। लक्ष्मण झूला से फूलचट्टी तक 10 किमी मोटर मार्ग है। इस पर सड़क बनाने के लिए वर्ष 2006 में स्वीकृत मिली थी। जिसके तहत नौ किमी फूलचट्टी-कोटा मोटर मार्ग पर लोक निर्माण विभाग को निर्माण करना था, लेकिन 12 साल बाद भी यह सड़क पक्की नहीं बन पाई है, जबकि इसके लिए 219.40 लाख की वित्तीय स्वीकृति भी हो चुकी है। स्थानीय निवासी शक्ति सिंह राणा, कोटा की प्रधान प्रभा देवी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राजपाल सिंह राणा ने बताया कि उक्त गांवों के सड़क संपर्क से नहीं जुड़ पाने के लिए ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा नहीं मिल पा रही। इससे क्षेत्र से पलायन हो रहा है।
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सरकारी महकमों में नहीं तालमेल
ऋषिकेश। गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए योजनाएं तो मंजूर हो रही हैं। मगर योजना को धरातल पर उतारने के लिए वर्षों लग जा रहे हैं। इसकी वजह लोक निर्माण विभाग, वन व राजस्व महकमे में तालमेल का अभाव देखा जा रहा है। 12 साल पहले स्वीकृत फूलचट्टी-कोटा मोटर मार्ग के मामले में यही बात सामने आई है। पीडब्ल्यूडी ने प्रस्तावित मोटर मार्ग में पड़ने वाली वन भूमि के हस्तांतरण के लिए वर्ष 2008-09 में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद से हस्तांतरण की प्रक्रिया इन्हीं महकमों में फंसी है। हाल ही में राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की ओर से प्रस्तावित 6.6375 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण के लिए पीडब्ल्यूडी से कॉर्डिनेट्स मांगे गए थे। जो पीडब्ल्यूडी ने राजस्व विभाग की मदद से उपलब्ध कराना है, मगर डेढ़ माह से इस पर कुछ नहीं हो पाया है।
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राजस्व विभाग नौ साल पहले दे चुका दोगुनी भूमि
ऋषिकेश। फूलचट्टी-कोटा मोटर मार्ग निर्माण की जद में आने वाली वन भूमि की एवज में राजस्व विभाग द्वारा प्लांटेशन के लिए 6.6375 हेक्टेयर वन भूमि के सापेक्ष 13.500 हेक्टेयर राज्य सरकार की भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए उपलब्ध कराई गई भूमि कोटा गांव में है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
सड़क योजना के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। भूमि हस्तांरित होते ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
- आशीष, अवर अभियंता, पीडब्ल्यूडी, दुगड्डा डिवीजन
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