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60 ने किया रक्तदान, 35 ने नेत्रदान

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ब्यूरो/अमर उजाला/सेलाकुई।
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उत्तराखंड पुलिस, अमर उजाला फाउंडेशन, अमूल्य जीवन विकास चैरिटेबल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को सहसपुर थाने में महंत इंदिरेश अस्पताल के सहयोग से रक्तदान और नेत्रदान शिविर का आयोजन किया गया। 60 लोगों ने रक्तदान किया। वहीं थानाध्यक्ष नरेश राठौर समेत 35 लोगों ने नेत्रदान संबंधी सहमति पत्र भरे। इससे पूर्व शिविर का शुभारंभ करते हुए थानाध्यक्ष नरेश राठौर ने कहा कि सभी को रक्तदान करना चाहिए। एक यूनिट रक्तदान दो लोगों की जान बचा सकता है। रक्तदान को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां है। जिसे दूर करने की जरूरत है।
थानाध्यक्ष ने कहा कि नेत्रदान करने से किसी की अंधेरी जिंदगी में उजाला कर सकता है। मरने के बाद मनुष्य की आंखें किसी काम की नहीं रह जाती, ऐसे में यदि इनसे किसी व्यक्ति की आंखों में उजाला हो सके तो इससे अच्छी बात कोई नहीं। रक्तदान के लिए बड़ी संख्या में लोग शिविर में पहुंचे। जिनमें से कुछ लोग अंडर वेट और एज होने के कारण रक्तदान नहीं कर सके। दिन चढ़ने के साथ ही शिविर में लोगों की संख्या में इजाफा होता चला गया।
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शिविर में महंत इंदिरेश अस्पताल की ओर से डॉ. अमित, अमित चंद, मोहित चावला, लेखनी सेमवाल, राजेश कुकरेती, पंकज, रोहित, अमनीष, अमूल्य जीवन विकास चैरिटेबल सोसाइटी की ओर से गणेश चंद, सुमित कुमार और एसआई राज विक्रम पंवार, सत्येंद्र भंडारी, गिरीश नेगी, सपुनी दसोनी, कविंद्र राणा, नवल किशोर गुप्ता, कांस्टेबल मुकेश पुरी, जितेंद्र आर्य, सुधीर कुमार, प्रवीण कुमार, मोहम्मद इजलाल, अमित कुमार, उमेश गिरी आदि मौजूद रहे।

इन्होंने किया नेत्रदान
शिविर में कांस्टेबल मुकेश पुरी, जितेंद्र आर्य, सुधीर कुमार, प्रवीण कुमार, अमित कुमार, एसआई गिरीश नेगी, सत्येंद्र भंडारी, सुमित, मोहित कुमार, बृजपाल सिंह, गणेश चंद्र, अंकित, शुभम, रोहित, सुधीर, हाजी सलीम, कुर्बान अली, मयंक, विक्रम, लक्ष्मण, प्रदीप, रविंद्र, शिवकुमार, संजय, रामनिवास, सुनील, अमित शाह ने नेत्रदान संबंधी सहमति पत्र भरे।
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शिविर की सराहना
क्षेत्र में पहली बार एक साथ आयोजित हुए स्वैच्छिक रक्तदान और नेत्रदान शिविर की लोगों ने बहुत सराहना की। स्थानीय निवासी रोहित, सुधीर, मयंक आदि का कहना है कि क्षेत्र में पहली बार आयोजित हुए नेत्रदान शिविर से लोग जागरूक हो सकेंगे और वह भी नेत्रदान करने के लिए बढ़-चढ़ कर आगे आ सकेंगे।
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